
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
जब दुनिया के बड़े देश और वैज्ञानिक पीने के पानी की कमी और गहराते जल संकट पर बहस कर रहे हैं, तब नॉर्वे के इंजीनियरों ने समंदर की अथाह गहराइयों में इसका एक स्थायी और सस्ता समाधान ढूंढ निकाला है. नॉर्वे के पश्चिमी तट पर मोंगस्टाड के पास एक ऐसी तकनीक का परीक्षण हो रहा है, जो भविष्य में दुनिया की प्यास बुझाने का सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है.
Flocean One दुनिया का पहला पूर्ण अंडरवॉटर डिसेलिनेशन, खारे पानी को मीठा बनाने वाला, प्लांट होगा. इसे समुद्र की सतह से लगभग 300 से 600 मीटर की गहराई में स्थापित किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट की क्रांतिकारी सोच और डिजाइन के कारण ही TIME मैगजीन ने इसे 2025 की बेस्ट इन्वेंशन्स की सूची में जगह दी है. यह प्लांट साल 2026 से अपना पूर्ण संचालन शुरू करने की उम्मीद है.
World’s first underwater desalination plant uses ocean pressure to halve energy use
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Norwegian startup Flocean plans to launch the world’s first commercial underwater (subsea) desalination plant, Flocean One, in Mongstad, Norway in 2026. Operating… pic.twitter.com/EJyQDu8uaR— Science Joy (@InsideOurBodies) December 31, 2025
आमतौर पर समंदर के पानी को मीठा बनाने के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिसमें पानी को झिल्ली (membrane) से गुजारने के लिए मशीनों द्वारा भारी दबाव बनाना पड़ता है. इसमें बिजली की खपत बहुत ज्यादा होती है.
Flocean One की खासियत यह है कि यह समुद्र की 600 मीटर की गहराई पर मौजूद प्राकृतिक दबाव (Natural Pressure) का उपयोग करता है. इतनी गहराई पर पानी का अपना दबाव इतना अधिक होता है कि वह बिना किसी बाहरी पंप के ही फिल्टर झिल्ली के पार चला जाता है. इससे बिजली की खपत में करीब 30 से 50 फीसदी तक की भारी कमी आती है. साथ ही, गहराई में सूर्य की रोशनी न पहुंचने के कारण काई (Algae) और बैक्टीरिया पनपने का खतरा भी कम होता है, जिससे फिल्टर लंबे समय तक चलते हैं.
एक अकेला स्टील कैप्सूल (यूनिट) रोजाना लगभग 1,000 क्यूबिक मीटर मीठा पानी बनाने में सक्षम है, जो करीब 37,500 लोगों की दैनिक जरूरतों को पूरा कर सकता है. यदि कई यूनिट्स को एक साथ जोड़ा जाए, तो यह क्षमता 50,000 क्यूबिक मीटर प्रतिदिन तक पहुंच सकती है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस तकनीक के लिए जमीन पर किसी विशाल फैक्ट्री की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे तटीय इलाकों की सुंदरता और पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित नहीं होता.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक दुनिया में पानी की मांग इसकी आपूर्ति से 40% अधिक हो जाएगी. ऐसे में पारंपरिक डिसेलिनेशन प्लांट जो बहुत महंगे और प्रदूषण फैलाने वाले होते हैं, उनके मुकाबले Flocean जैसे अंडरवॉटर प्लांट तटीय शहरों और द्वीपों के लिए वरदान साबित होंगे. यह तकनीक न केवल कम जगह लेती है, बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना भविष्य के लिए पानी की जंग को रोकने का एक मजबूत जरिया बन सकती है.
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