सिर्फ होर्मुज नहीं, क्या ट्रंप हिंद और प्रशांत महासागर तक कर रहे ईरान युद्ध का विस्तार? दुनिया की बढ़ने वाली है मुश्किल

Written By: Vineet Sharan Updated by: Vineet Sharan
Updated Date:April 23, 2026 8:20 AM IST

Iran war: हाल ही में रोके गए टैंकर जहाज़ एमटी टिफनी को 6 अप्रैल, 2026 को ईरान के खर्ग द्वीप टर्मिनल पर खड़ा देखा गया.

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Iran war: अमेरिकी सिर्फ होर्मुज में ईरानी जहाजों की घेराबंदी नहीं कर रहा है, बल्कि दुनिया के हर समंदर में तेहरान से जुड़े जहाजों पर नजर रख रहा है. यह बात मंगलवार को साबित हो गई जब अमेरिका ने हिंद महासागर में ईरान के एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया.

विशेषज्ञों के मुताबिक हिंद महासागर में तेल टैंकर को जब्त करना ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी का ही विस्तार है, जिससे तेहरान पर दबाव और बढ़ गया है.

कौन-सा है टैंकर और कहां हुई यह कार्रवाई

समुद्री ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि यह टैंकर, M/T Tifani (इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन जहाज नंबर 9273337), जो 20 लाख बैरल कच्चा तेल ले जा सकता है. इसे श्रीलंका और इंडोनेशिया के बीच रोका गया, जब यह फारसी खाड़ी से 3218 किलोमीटर दूर था.

जहाज और एक्शन की टाइमलाइन

  • 6 अप्रैल को ही यह खाड़ी के अंदर ईरान के खर्ग द्वीप तेल टर्मिनल पर था
  • फिर यह जहाज MT Tifani मलक्का जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहा था
  • 10 अप्रैल को यह ओमान की खाड़ी में, होर्मुज से बाहर, दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ा
  • 21 अप्रैल को हिंद महासागर में श्रीलंका से गुजरने के बाद, अचानक रास्ता बदल लिया
  • पहले 90 डिग्री कामोड़ लेकर दक्षिण की ओर मुड़ा, और फिर वापस पूरब की ओर मुड़ गया
  • इसके तुरंत बाद, US ने जहाज पर चढ़कर तलाशी लेने की घोषणा कर दी

डार्क फ्लीट तेल टैंकर

सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में Tifani की गतिविधियों से पता चलता है कि यह अक्सर फारस की खाड़ी और मलेशिया के पूर्वी बाहरी बंदरगाह सीमा (EOPL)के बीच यात्रा करता रहा है. EOPL एक ऐसी जगह है जहां "डार्क फ्लीट" टैंकरों से तेल को दूसरे जहाज़ों में ट्रांसफर किया जाता है, ताकि उसकी असली जगह का पता न चले और पाबंदियों से बचा जा सके. सैटेलाइट तस्वीरों से ऐसा लगता है कि यह एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर करता रहा है. पिछले एक साल में, टिफनी ने EOPL और सिंगापुर जलडमरूमध्य में ऐसे कई ट्रांसफर किए हैं.

तो क्या एशिया प्रशांत आ चुका है चपेट में

US जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने पिछले हफ्ते कहा था कि ईरान से जुड़े जहाजों के लिए अमेरिकी नेवी की वैश्विक पहुंच से बचना मुश्किल होगा. उन्होंने विशेष रूप से उस क्षेत्र का जिक्र किया, जिसकी देखरेख इंडो-पैसिफिक कमांड (INDOPACOM) करती है.

क्या होगा जहाज जब्ती का असर

फारसी की खाड़ी से हजारों किलोमीटर दूर संघर्ष के क्षेत्र का यह विस्तार शांति के लिहाज से ठीक नहीं है. यह किसी भी शांति वार्ता में सुलझाई जाने वाली खाई को और चौड़ा कर सकता है. अमेरिकी सेना के ऐसे कदम ईरान को शांति वार्ता में शामिल होने से रोक सकते हैं.

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