संयुक्त राष्ट्र: महिलाओं के समान अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र का मौलिक रुख सभी धर्मो के लिए लागू होता है ये बात यहां संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने कही. भारत के केरल में स्थित सबरीमाला मन्दिर में उच्चतम न्यायालय ने हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश का अधिकार दिया है जिसे लेकर कट्टरपंथियों ने हंगामा मचा रखा है और मंदिर में महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है. हालांकि 1 जनवरी को दो महिलाओं ने इस मंदिर में प्रवेश किया जिसके बाद राज्य में अशांति फैल गई. संयुक्त राष्ट्र का कहना है -विश्व निकाय कानून के शासन का सम्मान करता है. सभी को एक सामान हक मिलना चाहिए.

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सबरीमाला विवाद पर एक पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के उप प्रवक्ता फरहान हक ने कहा, “सभी के लिए समान अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र के रुख से आप अवगत हैं.”एक अन्य पत्रकार द्वारा केरल में दो महिलाओं के अयप्पा मंदिर में प्रवेश पर मचे बवाल और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अंडर-सेक्रेटरी-जनरल शशि थरूर द्वारा महिलाओं की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर हक ने कहा, “यह एक मुद्दा है, जिस पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की है. इसलिए, हमें इस मामले को भारत के कानून के शासन के हाथों में छोड़ देना चाहिए. बिल्कुल, हम चाहते हैं कि सभी पक्ष कानून का सम्मान करें.” सबरीमाला में दो महिलाओं के प्रवेश का वीडियो 2 जनवरी को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसके बाद कट्टरपंथियों द्वारा पूरे राज्य में बवाल मचाया जा रहा है.

यह पूछे जाने पर कि मंदिर में महिलाओं को प्रवेश नहीं देना क्या मानवाधिकार का उल्लंघन है? हक ने सीधा जवाब नहीं देते हुए कहा, “हम सभी को देश के काननू का सम्मान करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.”सर्वोच्च न्यायालय ने सितंबर 2018 में 10 से लेकर 50 वर्ष की महिलाओं के भगवान अयप्पा के मंदिर में प्रवेश करने पर लगी रोक हटा दी थी लेकिन कट्टरपंथियों को सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला रास नहीं आया तभी से पूरे राज्य में बवाल मचा हुआ है. (इनपुट एजेंसी)

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