लाहौर. पाकिस्तान चुनाव के नतीजे आने लगे हैं. नतीजे और रुझानों से साफ संकेत है कि सबसे बड़ी पार्टी के रूप में इमरान खान की पार्टी ‘पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ’ (PTI) सामने आई है. लेकिन खास बता है कि साल 2008 मुंबई धमाके के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की पार्टी की करारी हार हुई है. वहां की जनता ने कट्टरपंथी नेताओं को सिरे से खारिज कर दिया है. हालात ये है कि हाफिज के बेटे और दामाद तक की चुनाव में हार हो गई.

हाफिज सईद के प्रतिबंधित जमात-उद दावा की सियासी इकाई मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) ने अल्लाह-उ-अकबर तहरीक (एएटी) नाम की पार्टी से अपने 260 प्रत्याशियों को राष्ट्रीय एवं प्रांतीय चुनावों में उतारा है. हाफिज सईद का बेटा हाफिज तलहा सईद सरगोधा से एनए-91 से चुनाव लड़ रहा था. यह जमात-उद दावा नेता का गृहनगर है जो लाहौर से करीब 200 किलोमीटर दूर है. हाफिज सईद का दामाद खालिद वलीद पीपी-167 से प्रत्याशी था. ये उम्मीदवार एएटी के बैनर तले चुनाव लड़ रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान चुनाव आयोग ने एमएमएल का पंजीकरण करने से इनकार कर दिया है.
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मतदान करने के बाद हाफिज सईद ने संवाददाताओं से कहा कि लोगों को घरों से बाहर आकर ‘पाकिस्तान की विचारधारा’ के लिए मतदान करना चाहिए. उसने कहा, ‘‘मेरी तमन्ना है कि यह चुनाव देश के लिए उपयोगी साबित हो.’’उसने लोगों से ‘कुर्सी’ के लिए मतदान करने की अपील की जो एएटी का चुनाव चिन्ह है. बता दें कि हाफिज सईद ने मिल्‍ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) के बैनर तले अपने प्रत्‍याशियों को मैदन में उतारा था. लेकिन बाद में चुनाव आयोग की ओर से मान्‍यता देने से इनकार कर दिया गया था. इसके बाद हाफिज सईद ने अल्‍लाह-ओ-अकबर के बैनर तले अपने प्रत्‍याशियों को मैदान में उतारा.

FATF में चला गया पाकिस्तान
बता दें कि हाफिज सईद जैसे ही आतंकियों और उनके जैसे आतंकी संगठनों पर रोक लगाने में नाकाम रहने और उन्हें समर्थन देने की वजह से पिछले महीने पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF की ग्रे लिस्ट में डाल दिया गया था. ऐसा तब हुआ जब आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान दिवालिया होने के कगार पर है.

क्या होता है FATF
बता दें कि FATF का फुल फॉर्म फाइनेंशियल एक्शन टाक्स फोर्स होता है. इसकी ग्रे लिस्ट में जिस देश को डाला जाता है उसे वैश्विक मुद्रा संगठन किसी प्रकार का कर्ज नहीं देता है. हालांकि, चीन हर बुरे वक्त पर पाकिस्तान के साथ खड़े नजर आया है तो उसे सिर्फ उसी से उम्मीद है.

क्या सईद के पीछे इमरान और सेना थे?
पाकिस्तान चुनाव में शुरू से ही इमरान खान के पक्ष में माहौल बनने लगा था. पहले तो ये कहा जाने लगा कि इमरान की मदद सेना कर रही है. लेकिन अचानक ही ऐसा कहा जाने लगा कि सेना और इमरान दोनों हाफिज की भी मदद कर रहे हैं. इसके पीछे ये तर्क दिया जा रहा था कि इमरान अपनी पार्टी के पुर्ण बहुमत में नहीं आने की स्थिति में सईद के उम्मीदवारों से समर्थन ले सकती है. वहीं, सईद नवाज और भुट्टो के गढ़ों में मजबूती से लड़ रहे थे. इसका फायदा इमरान उठाना चाहते थे.

फेसबुक तक ने कर दिया था बैन
हाफिज सईद को सबसे पहला झटका फेसबुक ने दिया था. फेसबुक ने एमएलए के कई अकाउंटों और पेजों को बंद कर दिया था. इसके बाद जकरबर्क ने कहा था कि हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि दशों के चुनावों में सकारात्मक बातचीत हो. इसके लिए फेसबुक ने पाकिस्तान चुनाव आयोग से भी संपर्क किया था.

हाफिज ने ‘पाकिस्तान की विचारधारा’ पर मांगे ते वोट
हाफिज ने चुनाव की घोषणा के साथ ही लोगों से अपील की थी कि उनकी पार्टी ‘पाकिस्तान की विचारधारा’ के लिए चुनाव लड़ रही है. उसने कहा था कि यह पाकिस्तान के लिए उपयोगी साबित होगा. उसने कुर्सी चुनाव चिन्ह पर वोट डालने की अपील की थी.

कौन है हाफिज सईद
आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक और जमात-उद-दावा के चीफ हाफिज सईद का जन्म पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा में 10 मार्च 1950 को हुआ था. वह भारत की सर्वाधिक वांछित अपराधियों की सूची में शामिल है. मुंबई की 26/11 हमले में उसका हाथ होने की बात सामने आई थी. जमात-उद दावा को जून 2014 में अमेरिका ने विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था. आतंकी गतिविधियों के लिए अमेरिका ने सईद पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है.