पाकिस्तान-अफगानिस्तान में क्यों छिड़ी है जंग? किस वजह से हो गए हैं एक-दूसरे के खून के प्यासे

Pakistan Afghanistan Air Strike News: पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर एयरस्ट्राइक की है, जिसमें 400 से अधिक लोगों की मौत हो गई.

Published date india.com Updated: March 17, 2026 1:23 PM IST
पाकिस्तान-अफगानिस्तान में क्यों छिड़ी है जंग? किस वजह से हो गए हैं एक-दूसरे के खून के प्यासे

Pakistan Afghanistan War: दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब एक पूर्ण युद्ध की शक्ल अख्तियार कर चुका है. हाल ही में पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा अफगानिस्तान की राजधानी काबुल सहित कई इलाकों पर की गई बमबारी ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर दी है.

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद ने उस समय हिंसक मोड़ ले लिया जब पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने काबुल के आसमान में दस्तक दी. स्थानीय मीडिया और चश्मदीदों के अनुसार, पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल में पांच अलग-अलग ठिकानों पर भीषण एयरस्ट्राइक की.

अफगानिस्तान में 400 से ज्यादा लोगों की मौत

अफगान तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि इस हमले में अब तक 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, लगभग 250 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. भारी मात्रा में विस्फोटकों के इस्तेमाल के कारण पूरी रात काबुल धू-धू कर जलता रहा. धमाकों की गूंज और धुएं के गुबार ने शहर में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है.

युद्ध की चिंगारी कैसे भड़की?

इस ताजा सैन्य टकराव की नींव 21 फरवरी 2026 को पड़ी थी. डॉन न्यूज के अनुसार, पाकिस्तान ने दावा किया था कि प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलोच विद्रोही अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ कर रहे हैं. इसी आधार पर पाकिस्तान ने अफगान सीमा के भीतर हवाई हमले किए. अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान ने चुप बैठने के बजाय जवाबी हमला किया.

अफगान तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया कि उन्होंने पाकिस्तान की दर्जनों सीमा चौकियों पर कब्जा कर लिया और मुठभेड़ में 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया. इसके बाद पाकिस्तान ने काबुल और कंधार पर मिसाइलें बरसा दीं. पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के अनुसार, इस ऑपरेशन में 133 तालिबानी लड़ाके मारे गए और उनके कई मुख्यालय तबाह कर दिए गए. पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच झगड़े के दो मुख्य कारण हैं- तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और डूरंड लाइन.

133 साल पुराना विवाद

इस विवाद की जड़ें 133 साल पुरानी हैं. दरअसल, 1893 में ब्रिटिश राज के दौरान सर मोर्टिमर डूरंड और अफगान अमीर अब्दुल रहमान खान के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत 2,640 किलोमीटर लंबी एक सीमा रेखा खींची गई. इसे ही डूरंड लाइन कहा जाता है.

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अफगानिस्तान करता है इसका विरोध

अफगानिस्तान इस रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं मानता. उसका तर्क है कि अंग्रेजों ने यह रेखा जबरन खींची थी, जिसने पश्तून और बलूच परिवारों को दो हिस्सों में बांट दिया. 2017 में जब पाकिस्तान ने इस सीमा पर कटीले तार लगाने शुरू किए, तो तनाव और बढ़ गया. 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद से सीमा पर झड़पें आम हो गई हैं.

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का उभार

टीटीपी एक आतंकी संगठन है जिसका मकसद पाकिस्तान सरकार को हटाकर वहां शरिया कानून लागू करना है. 2007 में इस्लामाबाद की लाल मस्जिद में पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन साइलेंस के बाद टीटीपी का गठन हुआ था. इस संगठन ने 2014 में पेशावर के आर्मी स्कूल पर हमला कर 130 मासूम बच्चों की जान ले ली थी, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने इनके खिलाफ बड़े अभियान चलाए. पाकिस्तान का आरोप है कि जब से अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार आई है, टीटीपी के लड़ाकों को वहां सुरक्षित पनाह मिल रही है. तालिबान ने जेलों से कई टीटीपी आतंकियों को रिहा भी कर दिया है, जिससे पाकिस्तान की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो गया है.

दोनों देशों की सैन्य शक्ति की तुलना

सैन्य शक्ति की बात करें तो कागजों पर पाकिस्तान कहीं अधिक ताकतवर नजर आता है, जिसके पास 6 लाख सैनिक, 400 लड़ाकू विमान और परमाणु हथियार हैं. इसके विपरीत, तालिबान के पास करीब 1.5 लाख लड़ाके हैं, लेकिन उनके पास दशकों तक महाशक्तियों से गुरिल्ला युद्ध लड़ने का गहरा अनुभव है. विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के पास आधुनिक हथियार और परमाणु बम हैं, लेकिन तालिबान के पास दशकों तक महाशक्तियों (सोवियत संघ और अमेरिका) से लड़ने का अनुभव है. वे ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों में छिपकर वार करने में माहिर हैं.

दक्षिण एशिया में मंडरा रहा बड़े युद्ध का खतरा

फिलहाल दोनों देशों की सेनाएं डूरंड लाइन पर आमने-सामने खड़ी हैं, जिससे न केवल दक्षिण एशिया में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा मंडरा रहा है, बल्कि शरणार्थी संकट और आर्थिक अस्थिरता की आशंका भी बढ़ गई है. पाकिस्तान के बढ़ते कड़े रुख और तालिबान की जिद ने इस संघर्ष को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है जहां से शांति की राह मुश्किल नजर आ रही है. दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति के जरिए इस जंग को रोका जा सकता है या यह एक बड़े विनाशकारी युद्ध में तब्दील हो जाएगा.

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