इस्लामाबाद : पाकिस्तान चुनाव आयोग ने शुक्रवार को राष्ट्रीय और चार प्रांतीय असेंबली के 95 प्रतिशत परिणामों की घोषणा कर दी है, जिसमें पीटीआई सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. हालांकि अभी सरकार गठन के लिए इमरान खान के पास पूर्ण बहुमत नहीं है.

देश में बुधवार को हुए चुनाव के बाद मतगणना की प्रक्रिया धीमी है. चुनाव आयोग ने कहा कि पीटीआई ने नेशनल असेंबली की 269 में से 109 सीटों पर जीत दर्ज की है. इमरान के निकटतम प्रतिद्वंद्वी शाहबाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने 63 सीटें जीती हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के जेल जाने के बाद पार्टी की बागडोर संभाल रहे शाहबाज ने मतगणना में हेराफेरी और हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए परिणामों को खारिज कर दिया था. वहीं, इमरान ने गुरुवार को ही अपनी जीत की घोषणा कर दी थी और धोखाधड़ी के आरोपों को नकारते हुए इसे पाकिस्तान के इतिहास में सर्वाधिक पारदर्शी चुनाव बताया था.

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तीसरे स्थान पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) है। पार्टी ने 39 सीटें जीती हैं. अभी 20 सीटों पर मतगणना हो रही है. इमरान को सरकार गठन के लिए 137 सीटों की दरकार है, इसका मतलब यह है कि उन्हें सरकार बनाने के लिए छोटी पार्टियों का समर्थन लेना होगा.

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किसी एक पार्टी को अपने दम पर सरकार बनाने के लिए सीधे तौर पर निर्वाचित सीटों में से कम से कम 137 सीटों की जरूरत होगी. पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कुल 342 सदस्य होते हैं जिनमें से 272 को आम चुनावों में सीधे तौर पर चुना जाता है जबकि शेष 60 सीटें महिलाओं और 10 सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं. आम चुनावों में पांच फीसदी से ज्यादा वोट पाने वाली पार्टियां इन आरक्षित सीटों पर समानुपातिक प्रतिनिधित्व के हिसाब से अपने प्रतिनिधि भेज सकती हैं. कुल 172 सीटें पाने वाली पार्टी सरकार बना सकती है.

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इन चुनावों में 30 से ज्यादा राजनीतिक पार्टियों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे. इससे पहले पाकिस्तान मुस्लिम लीग – नवाज (पीएमएल – एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान तहरीक – ए – इंसाफ (पीटीआई) सहित कई प्रमुख पार्टियों ने मतदान की अवधि एक घंटा बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन इसके बावजूद मतदान अपने निर्धारित समय पर खत्म हुआ. राजनीतिक पार्टियों ने मतदान की धीमी प्रक्रिया की शिकायत की थी और मतदाताओं को और वक्त मुहैया कराने की मांग की थी. लेकिन चुनाव आयोग ने उनके अनुरोध को मानने से इनकार कर दिया था. नतीजे आने के बाद नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ ने इनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. अमेरिका ने भी चुनावी नतीजों की निष्पक्षता पर संदेह जताया है.