इस्लामाबाद। पाकिस्तान में अगले कुछ हफ्तों में होने जा रहे राष्ट्रीय चुनावों से पहले मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को करारा झटका लगा है. चुनाव आयोग ने सईद के संगठन जमात – उद – दावा की राजनीतिक इकाई मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत करने की अर्जी आज खारिज कर दी. इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने पाकिस्तान चुनाव आयोग से कहा था कि वह एमएमएल को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत करने की अर्जी खारिज कर दिए जाने के अपने फैसले की समीक्षा करे.

एमएमएल को मंजूरी देने से इनकार

अब्दुल गफ्फार सूमरो की अध्यक्षता वाली आयोग की चार सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में एमएमएल को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया. अपने संक्षिप्त आदेश में पीठ ने कहा कि आंतरिक मामलों के मंत्रालय की टिप्पणियों के मद्देनजर यह निर्णय किया गया है. मंत्रालय ने एमएमएल के संबंध प्रतिबंधित जमात – उद – दावा (जेयूडी) के नेता सईद से होने के कारण उसे राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत किए जाने को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की थी. मंत्रालय ने कहा था कि एमएमएल प्रतिबंधित जेयूडी की ही एक शाखा है.

पाकिस्तान में चुनाव नहीं लड़ेगा आतंकी हाफिज सईद, लेकिन उतारेगा 200 कैंडिडेट

बहरहाल, एमएमएल ने इससे इनकार किया कि जेयूडी से उसके संबंध हैं या एमएमल के प्रमुख सैफुद्दीन खालिद का सईद से कोई रिश्ता है. एमएमएल ने कहा कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग – नवाज और उसका नेतृत्व चुनाव आयोग की ओर से उसकी अर्जी खारिज करने के पीछे है. आगामी 25 जुलाई को होने वाले चुनावों में किस्मत आजमाने के लिए एमएमएल की शुरुआत बीते अगस्त में हुई थी. सईद पिछले महीने से ही एमएमएल के लिए चुनाव प्रचार कर रहा है.

मुंबई हमले का मास्टरमाइंड

अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बीच हाफिज सईद को कुछ महीने पहले ही नजरबंदी से रिहा किया गया था. इसके बाद उसने चुनाव लड़ने का फैसला किया और चुनाव आयोग में अर्जी भी डाल दी. लेकिन उसके मंसूबे पर इस फैसले से पानी फिर गया है. 2008 के मुंबई हमले में हाफिज का ही हाथ था. वहीं इस हमले का मास्टरमाइंड था जिसमें करीब 150 लोगों की जान गई थी. भारत उसके खिलाफ पाकिस्तान को सबूत भी मुहैया करा चुका है. लेकिन पाक सरकार ने हर बार दिखावे की कार्रवाई की जिससे वह बचता आ रहा है. अदालत ने भी हर बार हाफिज के पक्ष में फैसला सुनाया.