जि‍नेवा: पाकिस्‍तान के मुंह से आखिर मंगलवार को वह सच निकल ही गया, जिसे वह दुनिया से छिपाता है. स्‍विटजरलैंड के जिनेवा में यूनाइटेड नेशन्‍स ह्यूमन राइट काउंसिल (UNHRC) के सत्र के बाद जब पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मीडियाकर्मियों से कहा, भारत अपने जम्‍मू-कश्‍मीर में इंटरनेशनल मीडिया, एनजीओ और सिविल सोसाइटीज को क्‍यों नहीं जाने दे रहा, ताकि वे वहां की स्‍थ‍िति देख सकें.

वहीं, पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 42 वें सत्र को संबोधित करते हुए कश्‍मीर राग गया. कुरैशी ने कहा कि शीर्ष मानवाधिकार निकाय को मुद्दे को लेकर अपनी निष्क्रियता से विश्व मंच पर शर्मसार नहीं होना चाहिए.

बलूचिस्‍तान, पीओके में मानवाधिकारो की धज्जियां उड़ाने पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री ने कहा- यूएनएचआरसी को भारत द्वारा पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद कश्मीर की स्थिति के प्रति तटस्थ भाव नहीं अपनाना चाहिए. आज मैंने कश्मीर के लोगों के लिए न्याय और सम्मान की खातिर मानवाधिकार पर विश्व की अंतरात्मा के महत्वपूर्ण स्थल मानवाधिकार परिषद का दरवाजा खटखटाया है.

कुरैशी ने कहा कि भारत ने कश्‍मीर पर गैर-कानूनी तरीके से कब्‍जा कर रखा है. वहां मानवाधिकारों का हनन किया जा रहा है. पूरे कश्‍मीर को जेल बनाकर रख दिया गया है. यहां तक कि आपातकालीन मेडिकल सुविधाएं नहीं प्रदान की जा रही हैं. उन्‍होंने कई विदेशी मीडिया अखबारों की रिपोर्ट का जिक्र भी दिया. उन्‍होंने ये भी कहा कि इन वजहों से कश्‍मीर का मुद्दा भारत का आंतरिक मसला नहीं है, बल्कि ये अंतरराष्‍ट्रीय मसला है.