नई दिल्ली: पाकिस्तान में आज हो रहे आम चुनाव के एग्जिट पोल में क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को बढ़त मिलती दिख रही है. पूर्व पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल) इमरान खान की पीटीआई को कड़ी टक्कर दे रही है और दोनों के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है. एग्जिट पोल के मुताबिक जहां इमरान खान की पार्टी पीटीआई पाकिस्तान में राष्ट्रीय स्तर पर आगे दिख रही है वहीं पाकिस्तान के पंजाब राज्य में नवाज शरीफ की पीएमएल आगे दिख रही है. Also Read - Viral Video: पाकिस्तान में अनोखी शादी, दूल्हे को गिफ्ट में दी AK 47, लोग बोले- गरीब देश के अमीर...

सेना की भूमिका पर सवाल
पाकिस्तान के लोग आज होने वाले आम चुनाव में नए प्रधानमंत्री को चुनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. हालांकि चुनाव प्रक्रिया में ताकतवर सेना की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं और बड़ी संख्या में इस्लामी कट्टरपंथियों के चुनाव में हिस्सा लेने को लेकर भी चिंता जाहिर की जा रही है. पाकिस्तान के चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 3,459 उम्मीदवार नेशनल असेंबली की 272 सीटों के लिए चुनावी मैदान में है जबकि पंजाब , सिंध बलूचिस्तान और खैबर – पख्तूनख्वा प्रांतीय असेंबली की 577 सीटों के लिए 8,396 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. Also Read - J&K Latest News: जम्‍मू-कश्‍मीर के पुंछ में पाकिस्‍तान की फायरिंग में JCO शहीद

शाम 6 बजे तक होगा मतदान
पाकिस्तान में 10.596 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर हैं. देशभर के 85,000 मतदान केंद्रों पर सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक मतदान होगा. मतदान खत्म होने के तुरंत बाद इन्हीं केंद्रों पर मतों की गिनती की जाएगी और 24 घंटों के भीतर परिणाम की घोषणा कर दी जाएगी. Also Read - मुंबई हमले को भूल नहीं सकता भारत, अब नई नीति के साथ देश आतंकवाद से लड़ रहा है: PM मोदी

चुनाव से पूर्व मीडिया पर लगाम कसने की कई कोशिशें देखने को मिली हैं. इसके अलावा सेना द्वारा गुपचुप तरीके से पूर्व क्रिकेटर इमरान खान के अभियान के समर्थन और उनके राजनीतिक विरोधियों के निशाना बनाने के भी आरोप लगे हैं.

पाकिस्तान ने अपने 70 साल के इतिहास में कई बार तख्ता पलट देखा है और लगभग आधे समय तक सत्ता की बागडोर प्रत्यक्ष रूप से सेना के पास रही है. इसके अलावा असैनिक शासकों के काल में भी सेना ताकतवर रही है और देश की विदेश और सुरक्षा नीति तय करने में उसकी भूमिका अहम रही है.

सेना प्रमुख का आश्वासन
सेना को मजिस्ट्रेट स्तर की शक्ति देने के बाद से ही उसकी भूमिका पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. मतदान केंद्रों के भीतर और बाहर सेना की तैनाती के लिए भी पाकिस्तान के चुनाव आयोग की आलोचना होती रही है.

सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा ने हालांकि आश्वस्त किया है कि चुनाव ड्यूटी में लगाए गए सैनिक आयोग की आचार संहिता का कड़ाई से पालन करेंगे. उन्होंने कहा कि सेना चुनाव के दौरान केवल सहयोगी की भूमिका निभाएगी और चुनाव प्रक्रिया का पूरा नियंत्रण चुनाव आयोग के पास रहेगा.

भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराए गए पीएमएल – एन प्रमुख नवाज शरीफ भी यह आरोप लगा चुके हैं कि सेना ने उन्हें दोषी ठहराने के लिए न्यायपालिका पर दबाव बनाया. हालांकि दोनों संस्थाओं ने इन आरोपों को खारिज किया है.

(इनपुट: एजेंसी)