इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को लंदन में अपने डॉक्टरों से जरूरी मेडिकल रिपोर्ट पेश न कर जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में पाक सरकार ने ‘भगोड़ा’ घोषित कर दिया है. बुधवार को मीडिया में आई एक खबर में यह जानकारी दी गई. शरीफ (70) इलाज के लिए पिछले साल नवंबर में लंदन गए थे. लाहौर उच्च न्यायालय ने मेडिकल आधार पर उन्हें चार सप्ताह के लिए विदेश जाने की अनुमति दी थी. Also Read - Covid-19: कोरोना संक्रमित के साथ ली सेल्फी, पाकिस्तान में 6 आधिकारी सस्पेंड

शरीफ के डॉक्टर के अनुसार, पाक के तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके शरीफ को दिल की गंभीर बीमारी है जिसके लिए उनकी सर्जरी होनी है. डॉन अखबार की खबर के मुताबिक, सरकार ने मंगलवार को शरीफ की जमानत अवधि न बढ़ाने और उन्हें इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर गठित बोर्ड के समक्ष मेडिकल रिपोर्ट पेश न करके जमानत शर्तों का उल्लंघन करने के लिए ‘भगोड़ा’ घोषित किया. प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में संघीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया. सूचना पर प्रधानमंत्री की विशेष सहायक फिरदौस आशिक आवान ने कैबिनेट बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नवाज शरीफ के लंदन में किसी भी अस्पताल की अपनी मेडिकल रिपोर्ट न देने पर मेडिकल बोर्ड ने उनके द्वारा भेजे गए मेडिकल प्रमाणपत्र को खारिज कर दिया है और उन्हें भगोड़ा घोषित किया है. Also Read - कोविड-19: पाकिस्तान व विश्व बैंक के बीच 20 करोड़ डॉलर के ऋण पर हो रही चर्चा

24 दिसंबर 2019 में समाप्त हो चुकी है जमानत अवधि
उन्होंने कहा कि आज से कानून के अनुसार नवाज शरीफ भगोड़े हैं और अगर वह देश नहीं लौटते हैं तो उन्हें घोषित अपराधी माना जाएगा. फिरदौस ने कहा कि चिकित्सकीय आधार पर शरीफ के मामले की देख रेख करने के लिए इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की ओर से अधिकृत पंजाब सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री को कई पत्र लिखे और लंदन के किसी भी अस्पताल से मेडिकल रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा लेकिन वह ऐसा करने में विफल रहे. फिरदौस ने कहा कि उन्होंने केवल प्रमाण पत्र भेजा जो मेडिकल बोर्ड में स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने पूछा कि अगर वह गंभीर रूप से बीमार हैं तो बोर्ड को समग्र मेडिकल रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी जा रही है. उन्होंने कहा कि मेडिकल बोर्ड शरीफ की बीमारी और उनके इलाज के बारे में बारे में जानना चाहता है और जवाब देने में उनकी विफलता के कारण पंजाब सरकार ने उनकी जमानत अवधि (जो 24 दिसंबर 2019 में समाप्त हो चुकी है) आठ हफ्ते बढ़ाने के आवेदन को स्वीकार नहीं करने का निर्णय किया है. Also Read - करतारपुर कॉरिडोर की 16 अरब की परियोजना मंजूर