बुरा फंसा पाकिस्तान! अमेरिका के साथ गया तो घर जलेगा, ईरान का साथ देने से होगा US नाराज, कैसे उल्टी पड़ गई आसिम मुनीर की चाल?

Written By: Shivendra Rai Updated by: Shivendra Rai
Updated Date:March 2, 2026 12:46 PM IST

US Iran conflict: अगर पाकिस्तान ने अमेरिका को अपने एयर बेस इस्तेमाल करने दिए या लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया तो पाकिस्तान के अंदर आग लग जाएगी. वहीं अगर पाकिस्तान ने अमेरिका को खुलकर मना किया तो उसे डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है.

Pakistan’s situation in Iran US Conflict: पश्चिम एशिया के हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं. ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव है. इस समय पाकिस्तान भी बुरी तरह फंस गया है. पाकिस्तान की लीडरशिप को समझ नहीं आ रहा कि वह इस्लाम के नाम पर ईरान का समर्थन करे या आर्थिक फायदे लेने के लिए अमेरिका का साथ दे. अमेरिका-ईरान युद्ध का असर पाकिस्तान की सड़कों पर भी दिख रहा है. कुछ महीने पहले तक डबल गेम खेलकर खुद को वैश्विक राजनीति का तुर्रम खान समझने वाले पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ की हालत इस समय खस्ता है. इस पूरे मामले में पाकिस्तान कैसे फंसा है, आइये समझते हैं.

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अमेरिका-ईरान युद्ध पर क्या पाकिस्तान का आधिकारिक रुख?

पाकिस्तान ने ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के एयरस्ट्राइक में मारे जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन को लेकर चिंता जताई है. पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ ने एक बयान में कहा है कि उनकी सरकार दुख की इस घड़ी में ईरान के लोगों के साथ है. शहबाज़ शरीफ ने ये भी कहा कि युद्ध के दौरान भी राष्ट्र प्रमुखों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. हालांकि पाकिस्तानी पीएम में कहीं भी अमेरिका का जिक्र नहीं किया. न ही खुलकर ये कहा कि वह अमेरिकी हमलों की निंदा करते हैं.

पाकिस्तान के अंदरूनी हालात बिगड़े

ईरान पर अमेरिका के हमले के बाद 1 मार्च को पाकिस्तान के कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर हिंसक प्रदर्शन हुए. इसे काबू में करने के लिए गोलियां तक चलानी पड़ीं जिसमें 20 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. इन मौतों में कराची में 10 लोग, स्कार्दू में कम से कम आठ और राजधानी इस्लामाबाद में दो लोग मारे गए हैं. खास बात ये है कि कराची में मारे गए ज्यादातर लोग वाणिज्य दूतावास की सुरक्षा में मौजूद अमेरिकी सुरक्षाबलों की गोलियों से मारे गए.

कैसे बुरी तरह फंस गए हैं शहबाज़ शरीफ और मुनीर?

पाकिस्तान में बड़ी तादाद में शिया रहते हैं. पाकिस्तान की बाकी जनसंख्या भी इजराइल को दुश्मन देश के तौर पर देखती है. ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के बाद जनता दोनों के खिलाफ हो गई है. कुछ महीने पहले तक जिस अमेरिका को खुश करने के लिए शहबाज़ शरीफ और आसिम मुनीर अपने खनिज संसाधन तक बेचने को तैयार थे, उसी अमेरिका के खिलाफ अब पाकिस्तान की जनता सड़क पर उतर हो गई है.

माना जा रहा है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो अमेरिका पाकिस्तान से सपोर्ट मांग सकता है. आसिम मुनीर को इतना भाव देने के पीछे भी ट्रंप की यही रणनीति थी. अगर पाकिस्तान ने अमेरिका को अपने एयर बेस इस्तेमाल करने दिए या लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया तो पाकिस्तान के अंदर आग लग जाएगी. वहीं अगर पाकिस्तान ने अमेरिका को खुलकर मना किया तो उसे डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है.

अमेरिका में शुरू हो गया पाकिस्तान विरोध

कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर हिंसक प्रदर्शन के बाद अमेरिका में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा देखा जा रहा है. अमेरिकी कार्यकर्ता लॉरा लूमर ने अमेरिका के विदेश विभाग से मांग की है कि पाकिस्तानियों के सभी वीजा, यहां तक कि ग्रीन कार्ड भी रद्द कर दिए जाएं. लूमर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन को शरण दी थी और वहां कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया जाता है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान अमेरिका और भारत के लोगों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है.

पाकिस्तान में कितनी है शिया आबादी?

पाकिस्तान की कुल आबादी 25 करोड़ है. इसमें शिया 20 प्रतिशत हैं. हालांकि जब बात इजराइल के विरोध की आती है तो पूरा पाकिस्तान इस यहूदी देश के खिलाफ खड़ा नजर आता है. पाकिस्तान में फिलिस्तीन और गाजा को लेकर भी लोगों में गु्स्सा है. ज्यादातर पाकिस्तानी जनता इजराइल और अमेरिका को गाजा में मुसलमानों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार मानती है. पाकिस्तान के अंदर भी कई कट्टर जिहादी समूह हैं जो शहबाज सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं. अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध लंबा खिंचा तो इसकी आंच में पाकिस्तान का भी झुलसना तय है.

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