Pakistan News: वाशिंगटन के कूटनीतिक नजरिए में पाकिस्तान की स्थिति एक स्थायी सहयोगी जैसी कभी नहीं रही,. उसे केवल रणनीतिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला देश माना गया है. पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने यह बात कही है.
माइकल रुबिन को विदेश नीति के विश्लेषक और ईरान, तुर्किए और मिडिल ईस्ट के स्पेशलिस्ट माना जाता है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तीखी टिप्पणी में कहा, पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी कार्यकाल की शुरुआत से अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है. इस पर माइकल रुबिन ने कहा कि पाकिस्तान का हमेशा इस्तेमाल किया जाता है. यही अमेरिका का नीति है. उनके अनुसार, मौजूदा नेतृत्व यानी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रं भी इसी कड़ी का एक हिस्सा मात्र है.
उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप प्रशासन का कार्यकाल पूरा होने की ओर है और आगामी सरकार-चाहे वह रिपब्लिकन हो या डेमोक्रेट, संभवतः इस बात पर सहमत होगी कि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. ऐसे में अमेरिका, मुनीर से किए गए किसी भी वादे को निभाने के लिए खुद को मजबूर नहीं पाएगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान की आलोचना करते नजर आ रहे थे. हालांकि, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान को लेकर अमेरिका का रुख बदला है.
अमेरिका में हुए 9-11 हमले के बाद से पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों में भीषण तनाव देखने को मिला. अमेरिका को संदेह था कि इस हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने पनाह दी है. हालांकि, पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा. फिर अमेरिका ने पाकिस्तान में 2 मई 2011 को आतंकी ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया.
सुरक्षा कारणों की वजह से सालों तक अमेरिका के कई राष्ट्रपति समेत शीर्ष अधिकारी पाकिस्तान के किसी भी दौरे पर नहीं पहुंचे थे. अमेरिका के किसी राष्ट्रपति ने साल 2006 के बाद से अब तक इस देश का दौरा नहीं किया है. हालांकि, ईरान के साथ जारी लड़ाई के बीच समझौता वार्ता करने के लिए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंचे.
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