पश्चिम रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता परमाणु भंडारण देश बनता जा रहा है। और इसके मद्देनजर वह एक नए यूरेनियम संवर्धन कांप्लेक्स का निर्माण कर सकता है। विशेषज्ञों का यह आंकलन वाणिज्यिक उपग्रह चित्रण के आधार पर है। पाकिस्तान नए परमाणु स्थल का निर्माण इस्लामाबाद से 30 किलोमीटर पूर्व कहुटा शहर में कर रहा है।Also Read - FATF Grey List: FATF की ग्रे लिस्ट में रहेगा पाकिस्तान, आतंकियों पर कार्रवाई करने में नाकाम रही इमरान सरकार

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दरअसल यह कहुटा क्षेत्र इस्लामाबाद से 30 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। मिली जानकारी के अनुसार रिसर्च लेबोरेट्रीज़ का यह वर्क क्षेत्र 1.2 हेक्टेयर तक माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यहां पाकिस्तान दबे-छुपे तरह से परमाणु परीक्षण करने का प्रयास कर सकता है। यह भी पढ़ें: भारत ने पाकिस्तान की हेकड़ी की कम, UN में उठाया बलूचिस्तान का मुद्दा, कहा- समूचा जम्मू-कश्मीर हमारा Also Read - Punjab: भारत-पाकिस्तान सीमा के पास हथियारों का बड़ा जखीरा मिला, एक किलो हेरोइन बरामद

इस मामले में यह बात सामने आई है कि पाकिस्तान परमाणु कार्यक्रम के संस्थापक एयू खान सेंट्रीफ्यूज़ डिजाईन चुराकर पाकिस्तान जाने से पहले ही यूआरईएनसीओ में काम किया करते थे। यदि सेटेलाईट मैप में पाकिस्तान द्वरा परमाणु परीक्षण बढ़ाने का प्रयास करने की बात सामने आई है तो यह एक परेशानी हो सकती है।

ताजा सबूत बताते हैं कि कैसे पाकिस्तान अपने परमाणु शस्त्रागार को बढ़ाने के प्रति लगातार कोशिश में लगा हुआ है। उसका एकमात्र लक्ष्य आपूर्तिकर्ता समूह में शामिल होना है। लेकिन यह परमाणु आपूर्तिकर्ता के सिद्धांतों के साथ असंगत है।

28 सितंबर 2015 और फिर दुबारा 18 अप्रैल 2016 को एयरबस डिफेंस और स्पेन द्वारा लिए गए उपग्रह चित्रों का इस्तेमाल कर आईएचएस जेन की इंटेलिजेंस रिव्यू ने अपने विश्लेषण में पाया कि पाकिस्तान अपने क्षेत्र में एक नया यूरेनियम संवर्धन कांप्लेक्स स्थापित करने जा रहा है।

पाकिस्तान ने पहला परमाणु परीक्षण 1998 में किया था और माना जा रहा है कि तब से अब तक उसने 120 परमाणु हथियार विकसित कर लिए हैं, जोकि भारत, इस्राइल और उत्तर कोरिया से ज्यादा है।

आईएचएस जेन्स के प्रसार विशेषज्ञ कार्ल डेवी के अनुसार, जहां भंडारगृह का निर्माण हो रहा है, उस साइट पर यूरोपीय न्यूक्लियर फ्यूल कंपनी ‘यूरेनको’ के समान ही संरचना है। आईएचएस जेन्स के सैटेलाइट इमैजरी एनालिस्ट चार्ली कार्टराइट कहते हैं कि ‘यह संयोग भी हो सकता है क्योंकि पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के जनक ए क्यू खान पाकिस्तान लौटने से पहले यूरेनको में काम कर चुके हैं।’

पाकिस्तान फिलहाल उन 48 देशों के न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में एंट्री के लिए बेकरार है जो परमाणु सामग्री,तकनीक और उपकरणों के निर्यात को नियंत्रित कर परमाणु प्रसार को रोकने के लिए वचनबद्ध है।