इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का यह मानना है कि उन्होंने भारत से संबंध सुधारने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है. इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईपीआरआई) द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार मरगला कांफ्रेंस में इमरान ने गुरुवार को कश्मीर मसले को उठाते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद उन्होंने भारत से संबंध सुधारने के हरसंभव प्रयास किए क्योंकि दोनों देश जलवायु परिवर्तन से पैदा संकट और गरीबी की समान समस्या का सामना कर रहे हैं.

इसके बाद, इमरान अपनी पूर्व की भारत विरोधी टिप्पणियों पर उतर आए. उन्होंने कहा कि ‘भारत चरमपंथी विचारधारा की गिरफ्त में है जोकि नफरत और जातीय श्रेष्ठता पर आधारित है. यह वैसी ही है जैसी कि जर्मनी में नाजी पार्टी की थी. जब नाजी सत्ता में आए थे तो किसी को अंदाज नहीं था कि देश किधर जा रहा है. आज ऐसा ही स्थिति भारत की है.’

उन्होंने कहा कि ‘अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने कश्मीर मामले में दखल नहीं दिया तो इसका बेहद गंभीर परिणाम होगा क्योंकि दो परमाणु संपन्न देश आमने-सामने हैं.’ इमरान ने कहा कि भारत ने कश्मीर से विशेष दर्जे को इसलिए वापस लिया है क्योंकि ‘वह मुस्लिम बहुल कश्मीर में हिंदुओं को आबाद कर इसकी जनसांख्यिकीय स्थिति को बदलना चाहता है.’

इस बीच, भारतीय लेखक व शोधकर्ता डी. एस. जसपाल से मुलाकात के दौरान इमरान ने कहा कि करतारपुर गलियारे को शुरू करना इस्लामी सिद्धांतों और पाकिस्तान की अंतरधार्मिक सद्भाव को बढ़ाने की नीति के अनुरूप है. जसपाल बाबा गुरु नानक के 550वें प्रकाशोत्सव समारोहों में शामिल होने के लिए पाकिस्तान आए हुए हैं.

(इनपुट आईएएनएस)