
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
पाकिस्तान की पंजाब असेंबली में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उपप्रधानमंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने का प्रस्ताव पेश किया गया है. जियो न्यूज के मुताबिक PML-N के विधायक राणा मुहम्मद अरशद ने प्रस्ताव पेश किया. इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान के नेताओं की मध्यस्थता से ही अमेरिका-ईरान के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर हो पाया है. इससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता का रास्ता तैयार हुआ. इसके लिए दोनों नोबेल के हकदार हैं.
अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर 28 फरवरी से जंग छेड़ रखी थी. जंग के 40 दिन के बाद 8 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान से सीजफायर का ऐलान किया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया था कि उन्होंने यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की अपील के बाद लिया था. ईरान ने भी इसकी पुष्टि की थी. इसके बाद से पाकिस्तान दुनिया में खुद ही अपनी पीठ थपथपाने में लगा हुआ है. कई राजनीतिक एक्सपर्ट इसे पाकिस्तान की पॉलिटिकल स्ट्रैटजिक विनिंग भी बताते हैं.
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पाकिस्तान ने ईरान-अमेरिका में सीजफायर के लिए क्या किया?
अमेरिका और ईरान की जंग में पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें कई हफ्तों से जारी थीं. जंग शुरू होने के 3 हफ्ते बाद 22 मार्च को पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ट्रंप और पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से बात की. इसके अगले ही दिन ट्रंपने ईरान के गैस प्लांट्स पर 5 दिन के लिए हमले रोक दिए थे. इसेक बाद 29 मार्च को इस्लामाबाद में पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की मीटिंग हुई थी. फिर 8 अप्रैल को सीजफायर का ऐलान हो गया.
सीजफायर कराने की पाकिस्तान को क्यों पड़ी जरूरत?
दरअसल, पाकिस्तान-ईरान पड़ोसी हैं. फिलहाल पाकिस्तान की इकोनॉमी अस्थिर है. अगर हमले लगातार जारी रहते, तो कमजोर माली हालत वाला पाकिस्तान हमले से पैदा होने वाले आर्थिक संकट को नहीं झेल सकता था. लिहाजा जंग को रुकवाना मजबूरी थी और जरूरत भी.
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