सीजफायर कराने के लिए पाकिस्तानी PM को शांति का नोबेल देने की मांग, प्रस्ताव पेश

सीजफायर से पाकिस्तान को सबसे ज्यादा फायदा डिप्लोमेटिक लेवल पर मिलेगा. पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका को जंग से बातचीत के टेबल पर लाकर कूटनीतिक मोर्चे पर बढ़त बना ली है.

Published date india.com Published: April 10, 2026 11:30 PM IST
सीजफायर कराने के लिए पाकिस्तानी PM को शांति का नोबेल देने की मांग, प्रस्ताव पेश
Pakistan PM Shehbaz Sharif

पाकिस्तान की पंजाब असेंबली में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उपप्रधानमंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने का प्रस्ताव पेश किया गया है. जियो न्यूज के मुताबिक PML-N के विधायक राणा मुहम्मद अरशद ने प्रस्ताव पेश किया. इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान के नेताओं की मध्यस्थता से ही अमेरिका-ईरान के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर हो पाया है. इससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता का रास्ता तैयार हुआ. इसके लिए दोनों नोबेल के हकदार हैं.

अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर 28 फरवरी से जंग छेड़ रखी थी. जंग के 40 दिन के बाद 8 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान से सीजफायर का ऐलान किया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया था कि उन्होंने यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की अपील के बाद लिया था. ईरान ने भी इसकी पुष्टि की थी. इसके बाद से पाकिस्तान दुनिया में खुद ही अपनी पीठ थपथपाने में लगा हुआ है. कई राजनीतिक एक्सपर्ट इसे पाकिस्तान की पॉलिटिकल स्ट्रैटजिक विनिंग भी बताते हैं.

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पाकिस्तान ने ईरान-अमेरिका में सीजफायर के लिए क्या किया?
अमेरिका और ईरान की जंग में पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें कई हफ्तों से जारी थीं. जंग शुरू होने के 3 हफ्ते बाद 22 मार्च को पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ट्रंप और पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से बात की. इसके अगले ही दिन ट्रंपने ईरान के गैस प्लांट्स पर 5 दिन के लिए हमले रोक दिए थे. इसेक बाद 29 मार्च को इस्लामाबाद में पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की मीटिंग हुई थी. फिर 8 अप्रैल को सीजफायर का ऐलान हो गया.

सीजफायर कराने की पाकिस्तान को क्यों पड़ी जरूरत?
दरअसल, पाकिस्तान-ईरान पड़ोसी हैं. फिलहाल पाकिस्तान की इकोनॉमी अस्थिर है. अगर हमले लगातार जारी रहते, तो कमजोर माली हालत वाला पाकिस्तान हमले से पैदा होने वाले आर्थिक संकट को नहीं झेल सकता था. लिहाजा जंग को रुकवाना मजबूरी थी और जरूरत भी.

सीजफायर से पाकिस्तान को 5 फायदे

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  • सीजफायर से पाकिस्तान को सबसे ज्यादा फायदा डिप्लोमेटिक लेवल पर मिलेगा. पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका को जंग से बातचीत के टेबल पर लाकर कूटनीतिक मोर्चे पर बढ़त बना ली है. इससे आतंकवाद को लेकर डैमेज हुई पाकिस्तान की इमेज थोड़ी बहुत रिपेयर हो सकती है.
  • भले ही पाकिस्तान सीजफायर कराकर अपनी पीठ ठोक रहा हो. हकीकत है कि पाकिस्तान कर्ज के जाल में डूबता जा रहा है. हर बंदे पर औसतन 3 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ चुका है. जुलाई 2025 तक पाकिस्तान पर कुल 80.6 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (25.66 लाख करोड़) का कर्ज है. हालांकि, सीजफायर में मदद करने के एवज में पाकिस्तान को IMF और वर्ल्ड बैंक की तरफ से उसे आने वाले दिनों में लोन भी मिल सकता है. ईरान से भी पाकिस्तान को फायदा मिल सकता है.
  • ईरान के साथ पाकिस्तान की सीमा लगती है. दोनों देशों के बीच कभी-कभी तनाव भी देखने को मिलता है. सीजफायर से क्षेत्र में स्थिरता बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा पाकिस्तान को मिलेगा.
  • चीन और खाड़ी देशों के साथ पाकिस्तान के संबंध भी मजबूत हो सकते हैं, क्योंकि ये देश क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहते हैं. ऐसे में पाकिस्तान अपनी क्रेडिबलिटी बढ़ाने की कोशिश करेगा. पाकिस्तान दुनिया को यह बताएगा कि जब आप संकट में थे, तब हमने हल ढूंढा था. यानी जरूरत पड़ने पर उसे भी मदद मिलनी चाहिए.
  • ईरान-अमेरिका में सीजफायर का पॉजिटिव असर पाकिस्तान की मार्केट में भी पड़ा है. पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज (PSX) में 12,000 अंकों से अधिक का रिकॉर्ड उछाल देखा गया. कराची स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स कराची 100 (KSE) 14,162.58 अंक यानी 9.34% बढ़कर 165,836.05 पर बंद हुआ. यह KSE-100 इंडेक्स के इतिहास में एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त मानी जा रही है. इससे पहले कराची स्टॉक एक्सचेंज में इतनी बड़ी तेजी कभी नहीं देखी गई थी. ऐसे में आने वाले दिनों में पाकिस्तान की इकोनॉमी सुधर सकती है.

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