
Akarsh Shukla
मैं, आकर्ष शुक्ला, पिछले 8 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हूं और वर्तमान में India.com Hindi (ZEE Media) में शिफ्ट इंचार्ज की जिम्मेदारी निभाते हुए नेशनल टीम का नेतृत्व ... और पढ़ें
Pakistan and Afghanistan Conflict : पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बॉर्डर पर फिर से तनाव का माहौल गर्म हो गया है. रविवार की रात को दोनों देशों की सेनाओं में झड़प हुई, जिसमें दोनों तरफ से भारी नुकसान की खबरें आ रही हैं. अफगानिस्तान की तालिबान सरकार का दावा है कि उनके जवानों ने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया, जबकि पाकिस्तान कह रहा है कि 200 से ज्यादा तालिबान लड़ाके मारे गए और उनकी तरफ से 23 मौतें हुईं. ये झड़पें पाकिस्तान की तरफ से हाल ही में अफगानिस्तान में ‘आतंकी ठिकानों’ पर की गई बमबारी के बाद शुरू हुईं.
तालिबान के प्रवक्ता ने इसे अफगानिस्तान की सरजमीं और हवाई क्षेत्र के बार-बार उल्लंघन का बदला बताया. लेकिन इस पूरे घमासान की जड़ में है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान या TTP नाम का वो संगठन, जो दोनों देशों के रिश्तों में जहर घोल रहा है.
TTP, यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जिसे पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है, एक खूंखार आतंकी संगठन है जो अफगान-पाक बॉर्डर के इलाकों में सक्रिय है. ये ग्रुप पाकिस्तान की सरकार और सेना के खिलाफ लड़ता है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी संगठन घोषित किया गया है. हाल की झड़पों में TTP ही वो मुख्य वजह है, क्योंकि पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान TTP के सदस्यों को शरण दे रहा है, जो वहां से पाकिस्तानी जमीन पर हमले करते हैं.
लेकिन अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने रविवार को भारत की यात्रा के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों से इनकार किया. उन्होंने कहा कि उनके देश में TTP का एक भी सदस्य नहीं है. ये विवाद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहा है, और TTP की वजह से बॉर्डर पर तनाव कभी कम नहीं होता.
TTP के जन्म की बात करें तो इसकी शुरुआत 2007 में हुई थी, जब बैतुल्लाह महसूद ने कई छोटे-छोटे ग्रुपों को मिलाकर इसे बनाया. ये संगठन पाकिस्तान के ट्राइबल इलाकों में सेना के ऑपरेशनों के खिलाफ खड़ा हुआ था. पाकिस्तान की सरकार का कहना था कि ये ऑपरेशन अल-कायदा से जुड़े आतंकियों के खिलाफ थे, लेकिन TTP ने इसे अपने इलाकों पर हमला मानकर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी.
बैतुल्लाह महसूद की मौत के बाद अब नूर वाली महसूद इसका लीडर है, जो ग्रुप को चला रहा है. TTP के अलग-अलग फैक्शन थोड़ी-बहुत आजादी से काम करते हैं, लेकिन सबका मकसद एक ही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, TTP के अल-कायदा के सीनियर लीडर्स से पुराने रिश्ते रहे हैं, जो इसे और खतरनाक बनाते हैं.
TTP का मुख्य लक्ष्य पाकिस्तान की सरकार को उखाड़ फेंकना है और वहां शरिया कानून पर आधारित एक इस्लामिक अमीरात कायम करना. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स कहती हैं कि ये ग्रुप अपनी सख्त व्याख्या वाले शरिया को लागू करना चाहता है. अफगान तालिबान से विचारधारा मिलती-जुलती है, लेकिन दोनों अलग-अलग संगठन हैं और उनके कमांड अलग हैं. TTP ने पाकिस्तान में सेना, नेताओं और आम नागरिकों पर घातक हमले किए हैं, जिससे उत्तर-पश्चिमी इलाकों में अस्थिरता फैल गई है.
पाकिस्तान का दावा है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट करता है और बॉर्डर प्रांतों में हमले करता रहता है. 2021 में जब अफगान तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया, तब से TTP के हमलों में तेजी आई है. लेकिन अफगान सरकार हर बार इनकार करती है कि उनके यहां TTP का कोई ठिकाना नहीं है. इस पूरे विवाद में Durand Line का रोल भी अहम है, जो ब्रिटिश जमाने की वो सीमा रेखा है जिसे अफगानिस्तान मान्यता नहीं देता. TTP जैसे ग्रुप्स इसी इलाके में छिपकर हमले करते हैं, जिससे दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ जाती हैं.
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