लाहौर। पाकिस्तान में चुनाव को खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रभावित करते हुए अपने अनुसार किस तरह नतीजों को अपने पक्ष में जुटी हुई है इसका खुलासा आज एक बार फिर हुआ. पाकिस्तान उच्च न्यायालय के एक जज ने आरोप लगाया कि देश की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सहित अन्य मामलों में अनुकूल फैसले के लिए मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों पर दबाव डाल रही है.

न्यायपालिका स्वतंत्र नहीं

इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शौकत सिद्दिकी शनिवार को रावलपिंडी बार एसोसिएशन में बोल रहे थे. उन्होंने न्यायपालिका और मीडिया पर नियंत्रण को लेकर आईएसआई को आड़े हाथ लिया. उन्होंने कहा, आज न्यापालिका और मीडिया बंदूकवाला (सेना) के नियंत्रण में आ गए हैं. न्यायपालिका स्वतंत्र नहीं है. यहां तक कि मीडिया को भी सेना से निर्देश मिल रहे हैं. मीडिया सच नहीं बोल रहा है क्योंकि वह दबाव में है और उसके अपने हित हैं.

नवाज और मरियम को लेकर निर्देश

उन्होंने कहा, अलग अलग मामलों में आईएसआई वांछित परिणाम हासिल करने के लिए अपनी पसंद की पीठें गठित कराती है. आईएसआई ने मुख्य न्यायाधीश से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम नवाज 25 जुलाई को होने वाले चुनाव से पहले जेल से बाहर नहीं आएं. उसने उनसे यह भी कहा है कि एवेनफील्ड मामले में नवाज शरीफ और उनकी पुत्री की अपील की सुनवाई कर रही पीठ में मुझे शामिल नहीं करें. मुख्य न्यायाधीश ने आईएसआई से कहा कि वह उसकी पसंद की पीठ बनाएंगे.

नवाज की बेटी इतनी ‘शरीफ’ भी नहीं, मरियम और विवाद में चोली-दामन का साथ

पीठ ने शरीफ परिवार के सदस्यों की अपील पर सुनवाई चुनाव से बाद करना तय किया. शरीफ और मरियम दोनों एवेनफील्ड भ्रष्टाचार मामले में रावलपिंडी स्थित अडियाला जेल में 10 साल और सात साल की सजा काट रहे हैं. दोनों को 13 जुलाई को लंदन से स्वदेश पहुंचने पर गिरफ्तार कर लिया गया था. दोनों को एक जवाबदेही अदालत ने ब्रिटेन की राजधानी लंदन में परिवार के चार फ्लैटों के स्वामित्व को लेकर दोषी पाया था.