इस्लामाबाद: वित्तीय मदद के लिए अन्य देशों व आईएमएफ से गुहार लगा रहे पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने दावा किया है कि मित्र देशों की मदद से देश वित्तीय संकट से बाहर आ गया है और अर्थव्यवस्था पटरी पर आ गई है. जबकि पाकिस्तान में चालू खाते का घाटा अभी भी बना हुआ है. आर्थिक मदद के लिए पीएम इमरान खान चीन  समेत कई देशों की यात्रा कर चुके हैं. बता दें कि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने कहा था कि पाकिस्तान अमेरिका से कटोरा लेकर भीख न मांगे. इसकी बजाय वह भारत जैसे अपने पड़ोसी देश से रिश्ते मजबूत करे. Also Read - वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान का यूएई से समझौता, आर्थिक सहायता की पहली किश्त मिली

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सही रास्ते पर है!

स्टेट बैंक आफ पाकिस्तान के गवर्नर तारिक बाजवा का यह बयान ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब ने पाकिस्तान में विभिन्न परियोजनाओं में 20 अरब डालर निवेश की घोषणा की है. इसी रविवार को सऊदी क्राउन प्रिंस पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचे थे. अखबार डॉन में छपी खबर के अनुसार बाजवा ने लाहौर में एक निजी विश्वविद्यालय में सोमवार को अपने एक संबोधन में कहा कि अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का दौर समाप्त हो गया है. सरकार सही रास्ते पर है तथा सभी आर्थिक चुनौतियों से निपटने में सक्षम है. केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने चालू खाते के घाटे के बारे में बात की जिससे चालू वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई.

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चालू खाते का घाटा सबसे बड़ी बाधा

प्रधानमंत्री इमरान खान की अगुवाई वाली नई सरकार के लिए चालू खाते का घाटा एक वास्तविक चुनौती है. इमरान खान ने चीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया तथा तुर्की जैसे मित्र देशों की यात्रा कर घाटे से पार पाने के लिये निवेश और वित्तीय मदद का आग्रह किया था. बाजवा ने कहा कि चालू खाते के घाटे को समाप्त करने के लिए योजना तैयार की गई है. उन्होंने कहा कि घाटा देश के लिए सबसे बड़ी बाधा है. सरकार इसे कम करने के लिये पैकेज को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के साथ अब भी बातचीत कर रही है.

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