न्यूयॉर्क: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दक्षेस देशों के साथ हुई बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया कि सहयोगी और आर्थिक विकास के लिए दक्षिण एशिया क्षेत्र में शांति तथा सुरक्षा आवश्यक है. इसी बैठक के दौरान पाकिस्तान ने भारत पर क्षेत्रीय प्रगति और समृद्धि को अवरूद्ध करने का आरोप लगाया. न्यूयॉर्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक से इतर दक्षेस देशों के साथ गुरुवार को हुई बैठक के दौरान स्वराज ने यह बात कही. Also Read - Covid 19: पाक में हिंदुओं को सरकारी राशन तक नहीं दिया जा रहा, भूखे रहने की नौबत

दक्षेस में भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मालदीव और श्रीलंका शामिल हैं. इसकी स्थापना दक्षिण एशिया में लोगों के कल्याण के लिए दिसंबर 1985 में की गयी थी. दक्षेस की मंत्री स्तरीय बैठक में स्वराज ने कहा, ‘‘प्रगति और आर्थिक विकास लक्ष्यों को हासिल करने तथा हमारे लोगों की समृद्धि के लिए क्षेत्रीय सहयोग हेतु शांति और सुरक्षा का वातावरण बहुत जरूरी है.’’ उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया को खतरे में डालने वाली घटनाओं की संख्या बढ़ी है और क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति एवं स्थिरता के लिए आतंकवाद अब भी सबसे बड़ा खतरा है. Also Read - कोरोनावायरस से पीड़ित पाकिस्तान के दिग्गज स्क्वैश खिलाड़ी आजम खान का निधन

सूत्रों के मुताबिक स्वराज ने कहा, ‘‘यह जरूरी है कि बिना किसी भेदभाव के आतंकवाद को उसके सभी रूपों में और उसकी मदद करने वाले तंत्रों को खत्म करना जरूरी है.’’ स्वराज दक्षेस की बैठक समाप्त होने से पहले ही वहां से निकल आयी थीं. उनके बयान के कुछ ही देर बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संवाददाताओं से कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि दक्षेस परिणामोन्मुखी बने. Also Read - Covid-19: कोरोना संक्रमित के साथ ली सेल्फी, पाकिस्तान में 6 आधिकारी सस्पेंड

भारत का नाम लिए बगैर कुरैशी ने कहा, ‘‘हमने अगला कदम तय कर लिया है. मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि दक्षेस की प्रगति और क्षेत्र के संपर्क तथा समृद्धि के रास्ते में सिर्फ एक अवरोधक है.’’ यह पूछने पर कि दक्षेस बैठक के दौरान क्या उनकी स्वराज से बातचीत हुई, कुरैशी ने इससे इनकार किया. उन्होंने कहा, ‘‘वह बैठक की बीच से ही चली गयीं, शायद उनकी तबीयत ठीक नहीं रही होगी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘स्वराज क्षेत्रीय सहयोग की बात कर रही हैं, लेकिन मेरा सवाल है कि क्षेत्रीय सहयोग कैसे संभव होगा जबकि क्षेत्रीय देश साथ बैठने को तैयार नहीं है और उस वार्ता तथा चर्चा में आप ही अवरोधक हैं.’’