कुवैत सिटी: कुवैत में लोगों के बीच टिड्डी से बने व्यंजनों ने धूम मचा रखी है. कुछ लोग सिंके हुए टिड्डे का लुत्फ उठाना पसंद करते हैं तो कुछ को टिड्डे के सूखे हुए व्यंजन (ड्राई) पसंद हैं. पेशे से पत्रकार मूदी अल मिफ्ताह (64) ने कहा, ‘मुझे टिड्डे से बने व्यंजन बेहद पसंद हैं. यह मेरी बचपन की यादों से जुड़े हैं और मुझे मेरे दादा-दादी और पिता की याद दिलाते हैं.’ मिफ्ताह हर साल टिड्डों के बाजार में आने का इंतजार करती हैं और खुद ही उन्हें पकाती हैं. उनको टिड्डियों के करारा व्यंजन पसंद हैं. हालांकि मिफ्ताह बताती हैं कि उनके कई परिचित काफी पहले ही टिड्डे या अन्य कीट खाने छोड़ चुके हैं. लेकिन कुवैत में टिड्डी की खपत घट रही है, खासकर युवा पीढ़ी के बीच.

बता दें कि भारत के कई इलाकों में लोग टिड्डों से परेशान हैं. हरियाणा जैसे राज्य में टिड्डों के हमले से फसलें खराब हो रही हैं. वहीं, कुवैत जैसे देश में टिड्डे खाए जा रहे हैं. किराने का सामान खरीदने आए अली साद (20) भी टिड्डी या अन्य कीट खाना पसंद नहीं करते. वह कहते हैं, ‘मैंने कभी भी टिड्डी खाने के बारे में नहीं सोचा. जब हमारे पास खाने के लिये हर तरह का मांस है, तो मैं कीट क्यों खाऊं?’ टिड्डी दुनिया के कई हिस्सों में खाई जाती हैं और यह कुछ व्यंजनों का एक मुख्य स्रोत भी हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि वे प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्रोत है. कुवैत में बुजुर्ग लोगों के बीच अब भी यह व्यंजन खासे लोकप्रिय हैं.

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अबू महमूद (63) आमतौर पर मछलियां बेचते हैं, लेकिन जब सीजन आता है तो वह टिड्डी और कवक बेचना शुरू कर देते हैं. महमूद ने कहा कि “सर्दियों की रातों के दौरान टिड्डियों को पकड़ा जाता है (जब वे उड़ नहीं रहे होते हैं) और हम उन्हें सऊदी अरब से आयात करते हैं.” उन्होंने कहा कि मैं जनवरी से अप्रैल के बीच चलने वाले सीजन में टिड्डियों की लगभग 500 थैलियां बेच देता हूं. एक थैली का वजन आमतौर पर 250 ग्राम होता है.