Pig Kidney Works In Human: पहली बार इंसान में लगाई गई सुअर की किडनी, जानें आगे क्या हुआ

Pig Kidney Works In Human: यह सर्जरी 25 सितंबर 2021 को हुई थी. जिसमें एक आनुवंशिक रूप से संशोधित (जेनेटिकली मोडिफाइड) डोनर जानवर की किडनी वेंटीलेटर के भरोसे जिंदा एक ब्रेन डेड पेशेंट में लगाई गई.

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Pig Kidney Works In Human: अमेरिका में डॉक्टरों की एक टीम ने अस्थायी तौर पर सुअर की किडनी (pig kidney) को इंसान में ट्रांसप्लांट (Transplants) करने में सफलता हासिल की है. इस सर्जरी में शामिल हुए सर्जन भी इसे चमत्कार (Miracle Surgery) से कम नहीं मानते हैं.

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यह सर्जरी 25 सितंबर 2021 को हुई थी. जिसमें एक आनुवंशिक रूप से संशोधित (जेनेटिकली मोडिफाइड) डोनर जानवर की किडनी वेंटीलेटर के भरोसे जिंदा एक ब्रेन डेड पेशेंट में लगाई गई. ऐसा करने से पहले मरीज के परिजनों से दो दिन के इस एक्सपेरिमेंट के लिए रजामंदी ली गई थी और परिवार ने भी मेडिकल एडवांसमेंट के नाम पर इसके लिए इजाजत दे दी थी.

लांगोन स्थित न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय स्थित ट्रांसप्लांट इंस्टीट्यूट के निदेशक रॉबर्ट मोंटगोमरी ने एक इंटरव्यू में कहा, किडनी ने ठीक उसी तरह से काम किया, जिस तरह से इसे करना चाहिए. किडनी ने गंदगी को हटाया और मूत्र बनाया. इस किडनी ने क्रिएटिनिन अणुओं की संख्या को कम करने में मदद की. किडनी ट्रांस्पलांट से पहले मरीज का क्रिएटिनिन स्तर जो अधिक था, जिसे इस ट्रांसप्लांट किडनी ने कम करने में मदद की.

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करीब दो घंटे तक चली इस सर्जरी में रॉबर्ट का साथ उनके कई अन्य साथियों ने दिया. उन्होंने सुअर से ली गई किडनी (Organ Donation) को मरीज की रक्त वाहिकाओं से जोड़ा, ताकि वे इसकी जांच कर सकें और बायोप्सी के लिए सैंपल ले सकें.

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दरअसल मरीज अपने अंग दान करना चाहता था, लेकिन परिवार को उस समय निराशा हाथ लगी जब उन्हें बताया गया कि मरीज का अंग दान देने के लिए सही स्थिति में नहीं है. डॉक्टरों ने उन्हें दान करने का एक और तरीका बताया तो उन्होंने चैन की सांस ली. मरीज को वैंटीलेटर से हटा दिया गया और 54 घंटे के टेस्ट के दौरान उसकी मौत हो गई.

पहले ही रिसर्च में ये सामने आ चुका है कि सुअर कि किडनी अन्य जीवों को एक वर्ष तक जिंदा रख सकती है. लेकिन यह पहली बार है, जब इसका इस्तेमाल इंसान पर किया गया है. डोनर सुअर ऐसे समूह से संबंध रखता है, जिसकी जेनेटिक एडिटिंग की गई है. जेनेटिक एडिटिंग के जरिए शुगर का प्रोडक्शन करने वाले जीन को बाहर किया गया, जो एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करता, जिसके कारण ऑर्गन रिजेक्शन की आशंका बढ़ जाती. इस जीन एडिटिंग को यूनाइटेड थेरेप्टिक की सहायक बायोटेक फर्म रेविविकोर ने किया.

रॉबर्ट मोंटगोमरी ने कहा- हालांकि, यह प्रश्न अब भी मौजूद है कि सर्जरी के तीन हफ्ते बाद, तीन महीने बाद या तीन साल बाद क्या होगा. इसका उत्तर सिर्फ तभी मिल सकता है, जब हम इसका ट्रायल जिंदा इंसानों पर करें. लेकिन यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो हमें बताता है कि कम से कम शुरुआत में तो सुअर की किडनी इंसान में काम करती है. अब वह अपनी इस ट्रायल के निष्कर्ष को अगले महीने साइंटिफिक जर्नल को देने जा रहे हैं. उन्होंने कहा, इसको लेकर क्लिनिकल ट्रायल अगले एक-दो साल में होंगे.

जानकारों ने इस खबर का स्वागत किया है. हालांकि, वे किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले पीयर रिव्यूड डाटा का इंतजार करना चाहते हैं. ब्रिटेन में बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के सर्जन हायनेक मर्जेटल का कहना है, यदि इसकी पुष्टि हो जाती है तो यह ओर्गन ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में एक बड़ा कदम होगा और यह अंगों की कमी को भी पूरा करने में मदद करेगा.

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Published Date:October 21, 2021 12:23 PM IST

Updated Date:October 21, 2021 12:34 PM IST

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