चिंगदाओ: भारत- पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बीच दोनों देशों के नेता चीन में हाथ मिलाते हुए नजर आए, लेकिन सवाल ये है कि आखिर इन दो पड़ोसी देशों के दिल कब मिलेंगे. चीन में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में पीएम नरेन्द्र मोदी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन के साथ हाथ मिलाते हुए दिखाई दिए और दोनों ने संक्षिप्त में बातचीत की.

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में अफगानिस्तान की स्थिति का जिक्र करते हुए आंतकवाद की चुनौती तथा उसके प्रभाव पर चर्चा की, वहीं, हुसैन ने अपने संबोधन में इस बात का भरोसा दिलाया कि उनके देश में होने वाले आम चुनाव पाकिस्तान में आर्थिक स्थिरता को और मजबूत करेंगे.

पाकिस्तानी प्रेसिडेंट ने कहा कि चीन की बेल्ट एंड रोड़ परियोजना के हिस्से के रूप में चीन – पाकिस्तान आर्थिक गलियारे ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है. वहीं, भारत लगातार इस परियोजना का विरोध कर रहा है, क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से हो कर गुजरती है.

बता दें कि दोनों नेता 18 वें एससीओ शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए चीन में हैं. 8सदस्यीय इस संगठन में सदस्य देशों के बीच विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर के बाद दोनों नेताओं ने हाथ मिलाए. बता दें कि मोदी अन्य एससीओ देशों के नेताओं के साथ कम से कम छह द्विपक्षीय बैठकें कर चुके हैं लेकिन मोदी और हुसैन के बीच कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई है.

दरअसल, 2016 में उरी में सैन्य अड्डे में पाकिस्तानी आंतकवादी संगठन के हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव आ गया था. इसके बाद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा जासूसी के जुर्म में मौत की सजा सुनाए जाने से संबंध और बिगड़ गए हैं.

भारत ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए 2016 में इस्लाबाद में हो रहे 19 वें सार्क सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया था. भारत का कहना है कि आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते.
चीन में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी और पाकिस्तानी प्रेसिडेंट ममनून हुसैन के साथ हाथ मिलाते हुए नजर आए.  (इनपुुुट- एजेेंसी)