इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तान की जवाबदेही कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को 10 साल जेल की सजा सुनाई है. भ्रष्‍टाचार से संबंधित मामले में उनकी बेटी मरियम को भी सात साल जेल की सजा मिली है. इस फैसले के साथ नवाज शरीफ का राजनीतिक करियर समाप्‍त होने की संभावना जताई जा रही है.

68 साल के शरीफ फिलहाल मरियम के साथ लंदन में हैं. ये सजा उन्‍हें इसलिए सुनाई गई क्‍योंकि 1990 के दशक में आलीशान बंगले खरीदने के लिए उनके पास पैसे कहां से आए, इस बारे में वे कोर्ट को कुछ नहीं बता पाए. शरीफ को पिछले साल पाकिस्‍तान की सुप्रीम कोर्ट ने पद के लिए अयोग्‍य घोषित कर दिया था. कोई ने उन्‍हें बेईमान भी घोषित किया था क्‍योंकि अपने बेटे के स्‍वामित्‍व वाली कंपनी से होने वाली आय का उन्‍होंने खुलासा नहीं किया था. जानिए उतार-चढ़ाव से भरे नवाज शरीफ के राजनीतिक करियर के बारे में…

1949: लाहौर में उद्योगपतियों के कश्‍मीरी परिवार में नवाज का जन्‍म हुआ. आगे चलकर उन्‍होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री ली और लोहे के पारिवारिक व्‍यवसाय से जुड़ गए.

1976: जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार ने शरीफ के पारिवारिक लोहा व्‍यवसाय का राष्‍ट्रीयकरण कर दिया और शरीफ ने राजनीति में कदम रखा. उन्‍होंने पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग की सदस्‍यता ली. यहीं से भुट्टो परिवार के साथ उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत हुई.

1981: पंजाब प्रांत की सरकार में वित्‍त मंत्री और फिर 1985 में मुख्‍यमंत्री बने. इसके कुछ दिनों बाद पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग में विभाजन हुआ और शरीफ ने पीएमएल-एन का गठन किया.

1990: पहली बार पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री बने.

1993: राष्‍ट्रपति ने शरीफ को प्रधानमंत्री पद से बर्खास्‍त कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वे फिर से पीएम बने, लेकिन दबाव में उन्‍हें फिर इस्‍तीफा देना पड़ा. इसके बाद हुए चुनावों में बेनजीर भुट्टो के नेतृत्‍व वाली पाकिस्‍तान पीपुल्‍स पार्टी के हाथों उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.

1997: दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री चुने गए. उनके शासनकाल में पाकिस्‍तान ने भारत के परमाणु कार्यक्रम के जवाब में परमाणु हथियारों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया.

1999: जनरल परवेज मुशर्रफ ने तख्‍तापलट कर शरीफ को पद से हटा दिया. 1947 में आजादी मिलने के बाद यह देश में सैन्‍य तख्‍तापलट का चौथा मौका था. इसके बाद भ्रष्‍टाचार के आरोप में उन्‍हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई. उन पर सैन्‍य शासक मुशर्रफ के विमान को इस्‍लामाबाद में उतरने नहीं देने का आरोप था.

2000-2007: सैन्‍य शासन के साथ डील की चर्चाओं के बीच उन्‍हें साल 2000 में अज्ञातवास में सऊदी अरब जाने की अनुमति मिल गई. जिस दिन उनका परिवार इस्‍लामाबाद से रवाना हुआ, उसी दिन राष्‍ट्रपति ने उन्‍हें माफी दे दी.

2007: अज्ञातवास से स्‍वदेश लौटे. अगले साल होने वाले चुनावों में भागीदारी की. इस चुनाव के बाद ही मुशर्रफ के सैन्‍य शासन का अंत हुआ.

2008: बेनजीर भुट्टो की पीपीपी ने शरीफ की पार्टी को चुनावों में हरा दिया. इसी चुनाव के दौरान बेनजीर भुट्टो की हत्‍या हो गई थी.

2013: तीसरी बार प्रधानमंत्री बने. चुनावों में पीएमएल-एन के सहयोगियों को नेशनल असेंबली में बहुमत मिला.

4 अप्रैल, 2016: पनामा पेपर्स के खुलासे से शरीफ परिवार की विदेशी कंपनियों में सहभागिता का पता चला. इन्‍हीं कंपनियों से होने वाली आय से उन्‍होंने लंदन में आलीशान बंगले खरीदे थे.

28 अक्‍टूबर, 2016: क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने इमरान खान ने पनामा पेपर्स खुलासे की स्‍वतंत्र जांच की मांग की. ऐसा नहीं होने पर उन्‍होंने राजधानी इस्‍लामाबाद में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की धमकी दी. हालांकि, शरीफ ने इस मामले में किसी गलती से इंकार किया.

2 नवंबर, 2016: पनामा पेपर्स खुलासे के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ के खिलाफ भ्रष्‍टाचार के मामलों की जांच के लिए न्‍यायिक आयोग के गठन की घोषणा की. इसके बाद इमरान खान ने अपनी धमकी वापस ले ली.

28 जुलाई, 2017: सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ को पद के अयोग्‍य घाषित कर दिया क्‍योंकि सऊदी अरब में स्थित कंपनी से होने वाली कमाई का खुलासा नहीं किया था. हालांकि, पनामा पेपर्स में इस कंपनी की चर्चा नहीं थी. कोर्ट ने राष्‍ट्रीय जवाबदेही ब्‍यूरो को लंदन में बंगलों के मालिकाना हक के साथ पनामा पेपर्स खुलासे मामले में शरीफ के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया.

13 अप्रैल, 2018: सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ को आजीवन पद के अयोग्‍य घोषित कर दिया.

6 जुलाई, 2018: राष्‍ट्रीय जवाबदेही ब्‍यूरो की अदालत ने शरीफ को भ्रष्‍टाचार के मामले में दोषी मानते हुए 10 साल कारावास की सजा सुनाई.