वैटिकन सिटी: पोप फ्रांसिस ने गुड फ्राइडे के मौके पर दुनिया भर में व्याप्त दुख तकलीफों की निंदा की इनमें उन प्रवासियों की तकलीफें भी शामिल हैं जिनके लिए अन्य देशों के दरवाजे ‘राजनीतिक गुणाभाग’ के चलते बंद हैं और उन ‘मासूम तथा बेगुनाह’ बच्चों की तकलीफें भी शामिल हैं जो धर्मगुरुओं के हाथों यौन शोषण का शिकार हुए हैं. Also Read - Tips: इन आसान तरीकों से छुडाएं बच्चों की नाखून चबाने की आदत

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फ्रांसिस ने पैलाटाइन हिल पर एक छतरीनुमा मंच से रोम के कोलोसियम में रात में पारंपरिक मशाल को जलते देखा. रात के समय का यह जुलूस ईसा मसीह को क्रूस पर चढ़ाए जाने की याद दिलाता है. हजारों तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और देशवासियों के साथ, उन्होंने उन विचारों को सुना जिसकी रचना एक बुजुर्ग इतालवी नन ने की है. यह नन, तस्करी कर वेश्यावृत्ति में धकेली गई प्रवासी महिलाओं की बेहतरी के लिए 25 साल से काम रहीं हैं. Also Read - रिपोर्ट में दावा- प्रवासियों-मजदूरों को लॉकडाउन से पहले घर जाने देते तो इतना न बढ़ता कोरोना, अब देश चुका रहा भारी कीमत

पोप फ्रांसिस ने माना, चर्च के पादरियों और बिशप ने ननों का यौन उत्पीड़न किया

फ्रांसिस ने यीशु से की प्रार्थना
फ्रांसिस ने यीशु से प्रार्थना की कि ‘हमें आपके क्रॉस में दुनिया भर के क्रॉस देखने में मदद मिले. पोप ने उन लोगों का हवाला दिया जो भोजन और प्यार के लिए भूखे और अपने ही बच्चों या माता-पिता द्वारा ‘छोड़’ दिए गए हैं. इसके बाद उन्होंने दो मुद्दों पर जोर दिया. उन्होंने प्रवासियों के मुद्दों और बच्चों के साथ कैथोलिक पादरी के यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं से निपटने का उल्लेख किया. (इनपुट एजेंसी)