लंदन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से उनके बर्किंघम पैलेस में मुलाकात की और परस्पर हितों के मुद्दों पर चर्चा की. पीएम ने राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक ( चोगम ) से पहले महारानी से मुलाकात की. महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (91 साल ) राष्ट्रमंडल की प्रमुख हैं. लंदन में चोगम की बैठक में 53 शासनाध्यक्ष भाग लेंगे. इसके बाद महारानी बर्किंघम पैलेस में भव्य रात्रिभोज का आयोजन करेंगी.

भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत कई तरीकों से अभूतपूर्व रहा. यह ब्रिटेन के लिए दौरे के दौरे के महत्व को दर्शाता है और भारत – ब्रिटेन के संबंधों की परिपक्वता की कहानी बंया करता है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री थेरेसा मे के साथ 10 डाउनिंग स्ट्रीट में द्विपक्षीय चर्चा की. दोनों देश के नेताओं ने अलगाववाद , सीमापार आतंकवाद , वीजा और आव्रजन सहित आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की.

करीब एक दशक के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री चोगम शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. 2009 से पर्थ , कोलंबो और माल्टा चोगम बैठकों में भारतीय प्रधानमंत्री ने हिस्सा नहीं लिया था. भारत सरकार का कहना है कि चोगम शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की उपस्थिति यह संकेत देती है कि देश विभिन्न वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है.

ब्रिटेन में भारत के उप उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा कि बहुपक्षीय निकायों के साथ भारत का संपर्क लगातार बढ़ रहा है और राष्ट्रकुल अलग नहीं है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत अब स्पष्ट रूप से नेतृत्वकारी भूमिका निभाना चाहता है. पटनायक ने कहा कि भारत राष्ट्रकुल का सबसे बड़ा देश है और ब्रिटेन चाहता है कि वह इसमें अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाए.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रकुल के अंदर गतिविधियां बढ़ाकर भारत इसमें अपना संपर्क बढ़ा सकता है. इसमें अधिक संसाधनों और श्रमबल के अलावा वित्तीय योगदान शामिल है. वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री के सम्मेलन में भाग लेने की एक वजह राष्ट्रकुल प्रमुख महारानी एलिजाबेथ दो द्वारा उन्हें व्यक्तिगत रूप से भेजा गया पत्र भी है. यह महारानी की मेजबानी वाला आखिरी चोगम सम्मेलन होगा.

91 वर्षीय महारानी एलिजाबेथ दो लंबी यात्रा नहीं कर सकतीं , तो ऐसे में वह अन्य चोगम सदस्यों द्वारा भविष्य में होने वाले सम्मेलनों में भाग नहीं ले सकतीं. चोगम सम्मेलन प्रत्येक दो साल में होता है. इससे इस तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी हैं कि क्या महारानी के पुत्र और उत्तराधिकारी प्रिंस चार्ल्स को इस संगठन (चोगम) का अगला प्रमुख नियुक्त किया जा सकता है.