कोलंबो: श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने रविवार को कहा कि उद्दंड बर्ताव के चलते रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त किया गया और कहा कि महिंदा राजपक्षे को संविधान के अनुरूप नया प्रधानमंत्री बनाया गया है. बीते शुक्रवार की रात को विक्रमसिंघे की नाटकीय बर्खास्तगी के बाद राष्ट्र के नाम अपने पहले संदेश में सिरीसेना ने कहा कि 2015 में अपनी जीत के बाद से विक्रमसिंघे की राजनीतिक आचार-व्यवहार नामुनासिब था. Also Read - पीएम मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति और मॉरीशस के प्रधानमंत्री से की बात, बोले, संकट में साथ खड़ा है भारत

Also Read - आरबीआई से 40 करोड़ डॉलर मुद्रा अदला-बदली करार करेगा श्रीलंका, जानिए क्या है मामला

श्रीलंका के घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है भारत: वि‍देश मंत्रालय Also Read - कोरोना वायरस: बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका और अफगानिस्तान जाएगी भारतीय सेना, इस तरह करेगी मदद

राष्ट्रपति ने विक्रमसिंघे के इस आरोप को खारिज कर दिया की उनकी बर्खास्तगी असंवैधानिक और अवैध है. उन्होंने कहा, ” मैं यह बिल्कुल साफ करना चाहता हूं कि (राजपक्षे) की नई नियुक्ति संविधान की कठोरता से पालन करते हुए विशेषज्ञ कानूनी सलाह पर किया गया है.”

श्रीलंका में राजनीतिक संकट और गहराया, संसद सत्र अब 16 नवम्बर से

श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा, वे श्रीलंका के भविष्य को अपने इर्दगिर्द के ऐसे लोगों की मंडली के लिए मौज-मस्ती की चीज समझते दिखे, जिन्हें आमजन की सोच की जरा भी समझ नहीं है. सिरीसेना ने आरोप लगाया कि उन्होंने सुशासन की अवधारणा को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया, जबकि भ्रष्टाचार और बर्बादी हर तरफ आम हो गई.

पाकिस्तान में रिक्शा चालक के बैंक खाते में आए तीन अरब रुपए, एक कॉल से हुआ ऐसा हाल

मैत्रीपाला सिरीसेना ने कहा, ”नीतिगत मामलों हम दोनों के बीच विशाल अंतराल था. मैं मानता हूं कि हमारे बीच के सांस्कृतिक और नीतिगत मतभेद ने इस राजनीतिक एवं आर्थिक संकट में योगदान किया.”

पाकिस्‍तान ने इजराइली प्‍लेन की इस्‍लामाबाद में लैंडिंग की खबर से किया इनकार, दोनों देशों के बीच नहीं हैं रिश्‍तें

अपने संबोधन में सिरीसेना ने सेंट्रल बैंक बॉंड घोटाले पर विक्रमसिंघे पर तीखा हमला किया, जिसमें उनके मित्र अर्जुन महेन्द्रन पर आरोप लगाए गए थे. महेन्द्रन की नियुक्ति भी विक्रमसिंघे ने ही की थी. सिरीसेना ने कहा, ” बॉन्‍ड घोटाले के चलते देश अभूतपूर्व आर्थिक में फंस गया.”

श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने सिरीसेना ने विक्रमसिंघे पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने उनकी हत्या की कथित साजिश को बहुत हल्के ढंग से लिया. उन्होंने कहा, ”मुझे सूचना मिली के जांच कर रहे वरिष्ट पुलिस अधिकारी जान-बूझ कर अटार्नी जनरल के विभाग के अधिकारियों से मुलाकात से बच रहे थे.”