नई दिल्ली: पाकिस्तान के पेशावर में अल्पसंख्यक सिख समुदाय पर धर्म के नाम पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं. अपने समुदाय पर हो रहे धार्मिक हमलों के चलते पेशावर में कई सिख परिवार दूसरी जगह पलायन कर चुके हैं तो कई पलायन के इंतजार में हैं. पेशावर के 30 हजार सिखों में से करीब 60 फीसदी लगातार मिल रही धार्मिक धमकी के चलते या तो पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में या फिर भारत में पलायन कर चुके हैं. Also Read - पाकिस्तानी सैनिकों ने Ceasefire Violation किया, LoC पर BSF अफसर शहीद

हाल ही में हुए एक ऐेसे ही हमले में पेशावर के सामाजिक कार्यकर्ता और इलाके में अपनी दुकान चलाने वाले सिख चरनजीत सिंह पर हमला हुआ था, चरनजीत को अस्पताल ले जाते वक्त उनका निधन हो गया था. मीडिया से बात करते हुए पेशावर के एक लोकल सिख ने कहा कि मुझे लगता है जैसे पेशावर में सिखों का नरसंहार हो रहा है. Also Read - Viral Video: पाकिस्तान में अनोखी शादी, दूल्हे को गिफ्ट में दी AK 47, लोग बोले- गरीब देश के अमीर...

पाकिस्तान सिख काउंसिल (पीसीएस) के एक सदस्य ने कहा कि उनके समुदाय को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वो बाकी लोगों से अलग दिखते हैं. पीसीएस सदस्य बलबीर सिंह कहते हैं कि उनकी पगड़ी की वजह से उनको निशाना बनाया जा रहा है. कुछ स्थानीय सिख लोग तालिबान को भी इन हमलों की वजह मानते हैं. Also Read - J&K Latest News: जम्‍मू-कश्‍मीर के पुंछ में पाकिस्‍तान की फायरिंग में JCO शहीद

2016 में पाकिस्तान में सिखों पर हमले तब सुर्खियों में आए थे जब इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के सिख नेता सोरन सिंह की धार्मिक कट्टरता के चलते हत्या कर दी गई थी. इस केस में तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी ली थी लेकिन पुलिस ने उल्टा एक्शन लेते हुए स्थानीय हिंदू नेता बलदेव सिंह को ही ये कहते हुए गिरफ्तार कर लिया था कि बलदेव सिंह ने राजनीतिक दुश्मनी में सोरन सिंह की हत्या की है. हाल ही में केस के दो साल बीत जाने के बाद सबूत नहीं होने की वजह से बलदेव सिंह को बरी कर दिया गया है.

हालात इतने खराब हो चुके हैं कि स्थानीय सिख लोग अपनी जान बचाने के लिए अब अपने केश तक कटवाने को मजबूर हो रहे हैं और बाहर जाते समय पगड़ी पहनने से भी बच रहे हैं. पाकिस्तान में सिखों के लिए एक और बड़ी समस्या है कि उनके अंतिम क्रियाक्रम के लिए भी पर्याप्त संख्या में जगह नहीं मिल रही है.