Artificial Gravity: अंतरिक्ष की दुनिया बदलने जा रहा है ये देश, स्पेस में जनरेट करेगा ग्रैविटी

रूस की सरकारी कंपनी एनर्जिया ने कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण वाले अंतरिक्ष यान का पेटेंट लिया है. आज हम आपको इसी के बारे में बता रहे हैं.

Published date india.com Updated: December 25, 2025 10:21 PM IST
Artificial Gravity
Artificial Gravity

Artificial Gravity: रूस की सरकारी रॉकेट कंपनी एनर्जिया (Energia) ने एक नए तरह के अंतरिक्ष यान डिजाइन का पेटेंट हासिल किया है. इस डिजाइन की खास बात यह है कि यह अंतरिक्ष में कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण (Artificial Gravity) पैदा कर सकता है. माना जा रहा है कि यह तकनीक लंबे समय तक चलने वाले मानव अंतरिक्ष अभियानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है. अभी अंतरिक्ष यात्रियों को माइक्रोग्रैविटी में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसे यह तकनीक काफी हद तक कम कर सकती है.

कैसे काम करेगा ये सिस्टम?

रूसी सरकारी मीडिया संस्था TASS की रिपोर्ट के अनुसार, इस पेटेंट में ऐसा घूमने वाला सिस्टम बताया गया है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का लगभग 50 प्रतिशत यानी 0.5g पैदा करेगा. दस्तावेजों में एक अंतरिक्ष स्टेशन की रूपरेखा दिखाई गई है, जिसमें एक केंद्रीय मुख्य मॉड्यूल होगा. इसके साथ स्थिर और घूमने वाले दोनों हिस्से जुड़े होंगे. इन मॉड्यूल्स और रहने की जगहों को एक पूरी तरह सील और लचीले जोड़ से जोड़ा जाएगा, ताकि घूमने के दौरान भी सुरक्षा बनी रहे.

मुश्किल होगी राह

पेटेंट में इस तकनीक से जुड़ी कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है. सबसे बड़ी समस्या घूमते हुए स्टेशन पर ट्रांसपोर्ट यान का डॉक करना है. डॉकिंग के समय यानों को स्टेशन की घुमावदार गति के साथ तालमेल बिठाना होगा, जिससे जोखिम बढ़ सकता है. दस्तावेजों में माना गया है कि यह प्रक्रिया स्टेशन के इस्तेमाल को थोड़ा कम सुरक्षित बना सकती है. फिर भी, वैज्ञानिक मानते हैं कि सही तकनीक और अभ्यास से इन चुनौतियों को दूर किया जा सकता है.

अंतरिक्ष यात्रियों के सेहत को मिलेगा फायदा

कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है. लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और हड्डियों की घनत्व कम हो जाती है. जिससे थकान, चक्कर और समस्याएं भी होती हैं. अगर अंतरिक्ष स्टेशन में कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण हो, तो यात्रियों का शरीर पृथ्वी जैसी स्थिति के ज्यादा करीब रहेगा. इससे भविष्य में चंद्रमा, मंगल और गहरे अंतरिक्ष की यात्राएं आसान हो सकती हैं.

ISS के भविष्य

रूस ने इस परियोजना के लिए अभी कोई समयसीमा या बजट की जानकारी नहीं दी है, लेकिन यह पेटेंट ऐसे समय में सामने आया है, जब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के भविष्य पर चर्चा चल रही है.नासा और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने ISS को 2030 तक सेवा से हटाने की योजना बनाई है. रूस 2028 तक ISS में बना रहेगा. ऐसे में यह पेटेंट दिखाता है कि रूस भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशनों और नई तकनीकों में रुचि रखता है. आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय और निजी कंपनियां भी कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण वाले अंतरिक्ष स्टेशनों की दिशा में काम कर सकती हैं.

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