Russian Coronavirus Vaccine News Update: दुनिया के 200 से ज्यादा देशों में कोरोना वायरस (Coronavirus) कहर बरपा रहा है. भारत समेत कई देश कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. वहीं, रूस ने कोविड-19 की वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) बनाने का दावा किया है. हालांकि दुनियाभर के मेडिकल एक्सपर्ट और स्वास्थ्य एजेंसियां रूसी वैक्सीन की सेफ्टी और प्रभावकारिकता के बारे में पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है. रूस ने इस वैक्सीन का नाम स्पुतनिक-5 (Sputnik V) रखा है कि जो उसके एक उपग्रह का भी नाम है. दावा है कि इस टीके से Covid-19 के खिलाफ स्थाय़ी इम्यूनिटी विकसित की जा सकती है. Also Read - कोरोना वैक्सीन आने से पहले दुनियाभर में मौतों का आंकड़ा 20 लाख तक पहुंच सकता है : WHO

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित ऑस्ट्रेलिया के रोग प्रतिरक्षा वैज्ञानिक पीटर चार्ल्स डोहर्टी (Peter Doherty) ने भी कोविड-19 के रूसी टीके का आपात स्थिति में उपयोग शुरू किये जाने पर वैज्ञानिक समुदाय के संशय से सहमति जताई है. उन्होंने कहा कि ‘बड़ी चिंता’ यह है कि यदि इस टीके के सुरक्षित होने को लेकर संदेह सच साबित होता है, तो फिर अन्य टीकों की विश्वसनीयता पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है. Also Read - WHO On Covid-19: कोरोना वायरस को लेकर WHO ने फिर जारी की चेतावनी, 'अब भी नहीं संभले तो...'

डोहर्टी ने मेलबर्न से एक ई-मेल इंटरव्यू में कहा, ‘मुख्य चिंता यह है कि यदि सुरक्षा का कोई बड़ा मुद्दा उभरता है…तो मेरा दावा है कि बड़ी चिंता यह होगी कि यह अलग प्रक्रिया के तहत विकसित किये जा रहे अन्य टीकों के लिये टीकाकरण को कहीं अधिक खारिज कर सकता है.’ रूसी टीके का तीसरे चरण का व्यापक क्लीनिकल परीक्षण नहीं हुआ है. Also Read - India Covid Vaccine Update: ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन को लेकर आई एक अच्छी खबर, अब तीन लोगों पर...

मेलबर्न विश्वविद्यालय के डोहर्टी इंस्टीट्यूट में सूक्ष्म जीव विज्ञान एवं प्रतिरक्षा विभाग से संबद्ध वैज्ञानिक डोहर्टी का यह भी मानना है कि कम कीमत वाली दवा बनाने का बेहतरीन रिकार्ड रखने वाला भारत इस सिलसिले में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है. उन्होंने कहा, ‘कम कीमत वाली दवा और टीका निर्माण में भारत की शानदार पृष्ठभूमि को देखते हुए हम उम्मीद करते हैं कि भारत इसमें एक बड़ी भूमिका निभाएगा. आखिरकार, यह वैश्विक आर्थिक गतिविधि को पटरी पर लाने का सबसे तेज माध्यम है.’

डोहर्टी ने यह खोज की थी कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य कोशिकाओं और वायरस संक्रमित कोशिकाओं के बीच कैसे विभेद करती है. इसके लिये उन्हें स्विट्जरलैंड के एक वैज्ञानिक के साथ संयुक्त रूप से 1996 का मेडिसीन का नोबेल पुरस्कार मिला था. उन्होंने कहा, ‘रूस एक क्लीनिकल परीक्षण करने की प्रक्रिया में है, इसलिए यह देखा जाना बाकी है कि वे इससे कैसे आगे बढ़ते हैं. रूसी टीके, किसी भी सार्स-कोवी-2 टीके के साथ मुख्य मुद्दा यह है कि वह कितना सुरक्षित और कारगर है.’

(इनपुट: भाषा)