चीन के बाद रूस दुनिया की दूसरी महाशक्ति है जिसने खुलकर तालिबान का समर्थन किया है. रूस ने कहा है कि बीते 24 घंटे में तालिबान ने काबुल को पिछली सरकार के तुलना में ज्यादा सुरक्षित बना दिया है. अफगानिस्तान में रूस के राजदूत दमित्री झिरनोव ने यह बात कही. कुछ ऐसी ही बात चीन ने कही है. चीन ने भी कहा है कि वह अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार के साथ बेहतर रिश्ता चाहता है.Also Read - UN में अपने प्रतिनिधि को भेजना चाहता है Taliban, सोहेल शाहीन को बनाया गया नया राजदूत

इस बीच अमेरिका ने अफगानिस्तान में लगातार बिगड़ते हालात के बीच अपने दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों रूस और चीन से संपर्क किया है. बाइडन प्रशासन द्वारा यह संपर्क ऐसे समय में किया जा रहा है, जब अमेरिका को इस बात का डर है कि तालिबान को अलग-थलग करने पर मॉस्को और बीजिंग दोनों में से कोई एक या दोनों एक अंतरराष्ट्रीय सहमति को बाधित कर सकते हैं. Also Read - अफगानिस्तान में तालिबान ने IPL प्रसारण पर रोक लगाई, स्टेडियम में मौजूद लड़कियों को बताया वजह

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने सोमवार को अपने चीनी और रूसी समकक्षों के साथ अफगानिस्तान के घटनाक्रमों पर चर्चा की है. Also Read - रूसी यूनिवर्सिटी में गोलीबारी में 8 की मौत, कई घायल, खिड़की से कूदते नजर आए छात्र

विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि अमेरिका द्वारा काबुल में अपना दूतावास खाली करने और शेष राजनयिकों को हवाई अड्डे पर स्थानांतरित करने के एक दिन बाद ब्लिंकन ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को कॉल किया.

चीन ने हाल के हफ्तों में तालिबान के साथ काम करने में रुचि दिखाई है, जबकि अफगानिस्तान में रूस का अपना इतिहास रहा है.