न्यूयॉर्कः विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कहा कि आतंकवाद का हर रूप में सफाया करना ना सिर्फ दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच सार्थक सहयोग के लिए बल्कि क्षेत्र के अपने अस्तित्व के लिए भी पूर्व शर्त है. पाकिस्तान ने हालांकि इस बैठक का बहिष्कार कर दिया. उन्होंने कहा कि सार्क वास्तव में सिर्फ चूके हुए अवसरों की नहीं बल्कि जानबूझकर बाधाओं में फंसने की कहानी भी है. आतंकवाद उनमें से एक है.

दक्षिण एशियाई उपग्रह का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि भारत कैसे उस पहल को अंजाम दे रहा है जो पड़ोस को समृद्ध कर रहा है. दक्षिण एशियाई उपग्रह को सार्क क्षेत्र में गरीबी दूर करने के लिए वैज्ञानिक समाधान का पता लगाने के उद्देश्य से 2017 में लॉन्च किया गया था.

उन्होंने दक्षिण एशियाई यूनिवर्सिटी (एसएयू) का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, “एसएयू से स्नातक करने वाले 1,174 छात्र अपने देश के विकास में बेहद योगदान दे रहे हैं. हम एसएयू के निर्माण के लिए 100 फीसदी पूंजी लागत देने के लिए प्रतिबद्ध हैं.” उन्होंने कहा, “क्षेत्रवाद दुनिया के हर कोने में जम चुका है. अगर हम पिछड़ गए हैं तो इसके पीछे कारण है कि दक्षिण एशिया में अन्य क्षेत्रों की तरह सामान्य व्यापार और कनेक्टिविटी नहीं है.”

दक्षेस देशों के मंत्रियों की बैठक में देर से पहुंचे पाकिस्तान के विदेश मंत्री

जयशंकर ने कहा, “यह बदकिस्मती है कि हमने मोटर व्हीकल्स और रेलवे समझौतों जैसे कुछ कनेक्टिविटी उपक्रमों के संदर्भ में कोई प्रगति नहीं की है. इसी तरह भारत द्वारा शुरू किए गए सार्क रीजनल एयर सर्विस एग्रीमेंट में कोई प्रगति नहीं हुई है.” उन्होंने कहा, “पिछले साल की सफलता की कहानियां अलग हैं. हमारे सार्क भागीदार देशों के लिए नेशनल नॉलेज नेटवर्क (एनकेएन) का विस्तार (एनकेएन) श्रीलंका और बांग्लादेश में पूरी तरह लागू कर दिया गया है. भूटान में इसके विस्तार का उद्घाटन अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था.”

यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र के इतर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने जयशंकर के भाषण का बहिष्कार किया और भारतीय मंत्री के जाने के बाद ही वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. कुरैशी ने कहा कि यह बहिष्कार कश्मीर के मुद्दे पर किया गया.