सालेम (अमेरिका): इक्कीस साल के गुरकृपा सिंह (काल्पनिक नाम) संभवत: उन कुछ भाग्यशाली लोगों में शामिल हैं जो अमेरिका में गैरकानूनी रूप से घुसने और जेल जाने के बाद भी वहां नौकरी पा ली. अंबाला के निवासी इस शख्स को अमेरिका में घुसपैठिये के रूप में घुसने, राजनीतिक शरण के आवेदन और ओरेगॉन प्रांत के एक स्थानीय किराने की दुकान में दस डॉलर प्रति घंटे (650 रुपए) की नौकरी पाने में करीब 60 दिन और 60 हजार डॉलर (40 लाख रुपये से अधिक) की राशि लगी. Also Read - New York Firing: न्यूयॉर्क में हुई गोलीबारी में 2 लोगों की मौत, 14 घायल

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पांच एकड़ से अधिक भूमि के स्वामित्व वाले गुरकृपा के माता पिता ने कृषिभूमि और उनकी संपत्ति पर ऋण लेकर इस साल मई में हरियाणा के एक एजेंट को 17 लाख रुपये दिए थे, ताकि वह गुरकृपा को दक्षिणी मेक्सिको सीमा से होकर अमेरिका में गैरकानूनी प्रवेश दिलाने में मदद करे. इस सप्ताह अपनी नौकरी के आठवें दिन ओरेगॉन के इस शहर में एक छोटी सी किराने की ग्रामीण दुकान में से बात करते हुये गुरकृपा ने कहा, ‘हम (भारत से) मेक्सिको उड़ान भरकर पहुंचे.’

पांच फुट ऊंची दीवार कूदकर अमेरिकी धरती पर रखा कदम

हरियाणा से ओरेगॉन आने में कई किलोग्राम वजन कम करने वाले गुरकृपा ने कहा कि उनके समूह में हरियाणा और पंजाब के उनके आयुवर्ग के सात अन्य भारतीय शामिल थे. मेक्सिको से इस समूह को टेक्सास की अमेरिकी सीमा तक पहुंचाया गया जहां उन्होंने अपने पासपोर्ट और मोबाइल फोन फेंकने के बाद करीब पांच फुट ऊंची दीवार कूदकर अमेरिकी धरती पर कदम रखा. अमेरिकी धरती पर पहुंचने पर अमेरिकी सीमा गश्त अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. न तो गुरकृपा और ना ही समूह का कोई अन्य व्यक्ति अंग्रेजी बोलना जानता था.

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अधिकारियों ने पकड़ा तो सचिन, शाहरुख के बारे में पूछा

सीमा गश्त अधिकारियों ने इन लोगों से सचिन तेंदुलकर, शाहरुख खान आदि के बारे में बात की जिससे संकेत मिलते हैं कि संघीय विधि प्रवर्तन एजेंसियां टेक्सास सीमा से अवैध रूप से घुसने वाले भारतीयों को पकड़ते हैं. इसके बाद उन्हें टेक्सास की एक जेल में ले जाया गया. बाद में उसे अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन विभाग द्वारा संचालित एक हिरासत केन्द्र में ले जाया गया.

22 दिन की जेल हुई

गुरकृपा ने कहा कि वह कुल 22 दिन जेल में रहा. पंजाबी और हिन्दी का मिश्रण बोलने वाले गुरकृपा ने कहा कि उन्होंने न्यायाधीश से कहा कि वह भारत से इसलिए आए क्योंकि उन्हें भारतीय अधिकारियों के हाथों ‘राजनीतिक दमन’ का डर था. उन्होंने कहा, ‘मुझे न्यायाधीश को यही कहानी बताने के लिये कहा गया था.’

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15 लाख रुपए के बांड पर हुए रिहा

उनके एजेंट ने उन्हें 2.5 लाख रुपये में एक अटार्नी की सेवाएं लेने में मदद की. न्यायाधीश ने उनकी बातों पर राजी होकर उन्हें 15 लाख रुपये के बांड पर रिहा कर दिया. फिर पांच लाख रुपये में जमानतदार का इंतजाम किया गया. गुरकृपा ने कहा, ‘मैं 28 जून को सीटल जेल से रिहा हुआ.’ उनकी राजनीतिक शरण का आवेदन अब भी विचाराधीन है. इस प्रक्रिया में कई वर्ष लग सकते हैं.

फिर मिला जॉब कार्ड और नौकरी

इस बीच, उन्हें रोजगार कार्ड मिल गया जिसका हर साल नवीनीकरण कराना होगा. इस कार्ड से वह काम कर सकते हैं. इसके तुरंत बाद गुरकृपा ने श्रमिक परमिट के लिये आवेदन कर दिया. किराने की दुकान का मालिक उन्हें दस डालर प्रति घंटा (650 रुपये) देता है. वह अपने पहले वेतन का इंतजार कर रहे हैं ताकि कुछ धन भारत में रह रहे माता पिता को भेजा जा सके.