Saudi Arabia And Qatar Sign Historic 785 Km High Speed Rail Deal Riyadh To Doha In Just 2 Hours By 2031
सऊदी-कतर की दोस्ती की नई मिसाल, 300 किमी/घंटा रफ्तार वाली पहली रेल लाइन बनेगी, 2 घंटे में पूरा होगा 785 किमी का सफर
यह हाई-स्पीड रेल लिंक सऊदी अरब और कतर के बीच संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, साथ ही पूरे खाड़ी क्षेत्र में कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा. यह परियोजना न केवल आर्थिक विकास का प्रतीक है, बल्कि शांति और सहयोग की मिसाल भी.
सऊदी अरब और कतर ने हाल ही में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत दोनों देशों के बीच पहली हाई-स्पीड रेल लाइन का निर्माण होगा. यह परियोजना न केवल दोनों देशों के बीच यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि आर्थिक, पर्यटन और क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. यह समझौता 8 दिसंबर 2025 को रियाद में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल थानी की यात्रा के दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की उपस्थिति में किया गया. यह दोनों देशों के बीच 2021 में सुलह के बाद संबंधों में सुधार का एक और बड़ा कदम है.
यह रेल परियोजना दोनों देशों के बीच पहली रेल सहयोग परियोजना है. यह परियोजना सऊदी विजन 2030 और कतर नेशनल विजन 2030 के लक्ष्यों से जुड़ी है, जो आर्थिक विविधीकरण, पर्यटन और सतत विकास पर जोर देती हैं. रेल लाइन की कुल लंबाई 785 किलोमीटर होगी. यह सऊदी अरब की राजधानी रियाद से शुरू होकर कतर की राजधानी दोहा तक जाएगी.
ट्रेनें 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी
ट्रेनें 300 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से चलेंगी, जिससे रियाद से दोहा की यात्रा केवल 2 घंटे में पूरी हो जाएगी. यह लाइन सऊदी अरब के किंग सलमान इंटरनेशनल एयरपोर्ट (रियाद) को कतर के हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट (दोहा) से जोड़ेगी, जिससे हवाई और रेल यात्रा का एकीकृत नेटवर्क बनेगा. यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक हाई-स्पीड रेल होगी, जो पर्यावरण के अनुकूल होगी और कार्बन उत्सर्जन को कम करेगी.
8 दिसंबर 2025 को रियाद के अल-यमामा पैलेस में हस्ताक्षर हुए. जिसमें सऊदी अरब की ओर से परिवहन और लॉजिस्टिक्स मंत्री सालेह अल-जासर. कतर की ओर से परिवहन मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन मोहम्मद अल-थानी शामिल हुए.
दोनों देशों के संयुक्त जीडीपी पर प्रभाव
परियोजना से दोनों देशों के संयुक्त जीडीपी पर लगभग 115 अरब सऊदी रियाल (करीब 30.7 अरब अमेरिकी डॉलर) का प्रभाव पड़ेगा. निर्माण कार्य 6 वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है, यानी 2031 तक चालू हो सकती है.
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