इस्लामाबाद: पाकिस्तान उच्च न्यायालय ने अपहरण और जबरन धर्मान्तरण के बाद मुस्लिमों से शादी करने को मजबूर की गई दो हिंदू लड़कियों की सुरक्षा को लेकर उत्पन्न चिंता के मद्देनजर उन्हें आधिकारिक संरक्षण देने का आदेश दिया है. बता दें कि हिन्दू पाकिस्तान में सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है. आधिकारिक अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान में करीब 75 लाख हिंदू रहते हैं. मीडिया की खबरों के अनुसार सिंध प्रांत के अकेले उमेरकोट जिले में हर महीने केवल करीब 25 शादियां जबरन कराई जाती हैं.

इमरान खान ने दो हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह की घटना की जांच के लिए दिए आदेश

होली के मौके पर सिंध प्रांत के घोटकी जिले से 13 वर्षीय रवीना और 15 वर्षीय रीना का कुछ रसूखदार लोगों ने अपहरण कर लिया था. उनके अपहरण के कुछ वक्त बाद ही, एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक काज़ी दोनों का निकाह (शादी) कराते हुए दिख रहे थे. इससे देश भर में गुस्से का माहौल बन गया. प्रधान न्यायाधीश अतहर मिनल्ला ने इस मामले की सुनवाई की.

उन्होंने दोनों लड़कियों का संरक्षण इस्लामाबाद के उपायुक्त और मानवाधिकार के महानिदेशक को सौंपा. उन्होंने आदेश दिया कि एक महिला पुलिस अधीक्षक को बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया जाए. अदालत ने अधिकारियों को दो अप्रैल तक जांच की रिपोर्ट उनके समक्ष पेश करने को कहा. इसके बाद अन्य निर्देश जारी किए जाएंगे.

अदालत ने इस बात का भी जिक्र किया कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी मामले में जांच के आदेश दिए हैं. लड़कियों के परिवार ने उनके इस्लाम में धर्म परिवर्तन को लेकर 20 मार्च को प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

नाबालिग हिन्दू लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और शादी को लेकर भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पाकिस्तान के सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी के बीच भी वाक् युद्ध छिड़ गया था. स्वराज ने इस पर पाकिस्तान में भारतीय राजदूत से विवरण मांगा था, जिसके बाद यह वाक युद्ध छिड़ा था. स्वराज ने मीडिया की एक खबर को टैग करते हुए ट्वीट किया था कि उन्होंने पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त से मामले पर रिपोर्ट भेजने को कहा है.

पुलिस ने बाद में पंजाब के रहीम यार खान जिले में कई स्थानों पर छापेमारी कर दोनों की शादी कराने वाले निकाह खान, पाकिस्तान सुन्नी तहरीक के एक नेता और लड़कियों से शादी करने वाले दो पुरुषों के कुछ रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया गया था.