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4000KG वजन और 8690KM की रफ्तार... SpaceX के रॉकेट का हिस्सा चांद से टकराया

वैज्ञानिकों का मानना है कि ये हिस्सा करीब 8690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चांद की सतह से टकराया. यह कोई तयशुदा मिशन नहीं था, बल्कि मिशन पूरा होने के बाद अंतरिक्ष में भटक रहा रॉकेट स्टेज अपने रास्ते में चांद से टकरा गया. इस टक्कर के बाद चांद की सतह पर एक नया क्रेटर बनने की संभावना जताई जा रही है.

Written by: Ikramuddin
Updated: August 5, 2026, 5:47 PM IST

अंतरिक्ष की दुनिया में अभी एक ऐसी घटना की चर्चा है, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. दरअसल SpaceX के एक पुराने Falcon 9 रॉकेट का करीब 4000 किलोग्राम वजन वाला अपर स्टेज चांद से टकराने का दावा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये हिस्सा करीब 8690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चांद की सतह से टकराया है. बताया गया कि ये कोई तयशुदा मिशन नहीं था, बल्कि मिशन पूरा होने के बाद अंतरिक्ष में भटक रहा रॉकेट स्टेज अपने रास्ते में चांद से टकरा गया.

चांद पर नया क्रेटर बनने की संभावना

इस टक्कर के बाद चांद की सतह पर एक नया क्रेटर बनने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि इस टक्कर से पृथ्वी पर किसी तरह का खतरा नहीं है. चंद्रमा पर वातावरण नहीं होने की वजह से ऐसी टक्कर के निशान लंबे समय तक बने रह सकते हैं. अब NASA और दूसरे अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस घटना का अध्ययन करेंगे. उनका मकसद यह समझना है कि इतनी तेज रफ्तार से हुई टक्कर का चंद्रमा की सतह पर क्या असर पड़ा और इससे भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए क्या जानकारी मिल सकती है.

रॉकेट का हिस्सा कैसे पहुंचा चांद तक?

जानकारी के अनुसार ये रॉकेट स्टेज अपना काम पूरा करने के बाद पृथ्वी की कक्षा में वापस नहीं लौट सका. समय के साथ इसकी दिशा बदलती गई और आखिरकार यह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आ गया. इसके बाद यह चांद की सतह से टकरा गया. वैज्ञानिकों का मानना है कि टक्कर Einstein Crater के आसपास हुई होगी. अब NASA और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां इस घटना का अध्ययन करेंगी.

चांद की सतह पर फैला मलबा

वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि इतनी तेज रफ्तार से हुई टक्कर के बाद चांद की सतह पर कितना मलबा फैला, नया क्रेटर कितना बड़ा बना और भविष्य के चंद्र मिशनों पर इसका क्या असर पड़ सकता है. इस अध्ययन से चंद्रमा की सतह की संरचना और अंतरिक्ष में बढ़ रहे स्पेस डेब्रिस के प्रभाव को समझने में भी मदद मिलेगी.

वैज्ञानिक देख रहे अवसर

वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी घटनाएं अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए अहम अवसर होती हैं. इससे भविष्य में चंद्रमा पर होने वाले मिशनों की बेहतर योजना बनाने और अंतरिक्ष में छोड़े गए रॉकेटों के मलबे को सुरक्षित तरीके से संभालने में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है.

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