2 लाख का पड़ गया एक कबूतर! 71 साल की बुजुर्ग महिला ने ऐसा क्या कर दिया कि कोर्ट ने ठोक डाला जुर्माना

सिंगापुर की एक अदालत ने 71 साल की भारतीय मूल की महिला पर कबूतरों को दाना डालने के मामले जुर्माना लगाया है. आइए जानते हैं कोर्ट ने ऐसा क्यों किया...

Published date india.com Published: February 4, 2026 11:14 PM IST
Singapore pigeon feeding fine
Singapore pigeon feeding fine

सिंगापुर की एक अदालत ने 71 साल की भारतीय मूल की महिला पर कबूतरों को दाना डालने के मामले में सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने महिला पर करीब 3,200 सिंगापुर डॉलर (लगभग 2.27 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि महिला ने बार-बार चेतावनी और सजा मिलने के बावजूद कानून का उल्लंघन किया. सिंगापुर में बिना लिखित अनुमति के जंगली जानवरों या पक्षियों को दाना डालना अपराध की श्रेणी में आता है और इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा माना जाता है.

कौन हैं शमला?

जुर्माना झेलने वाली महिला का नाम सन्मुगमनाथन शमला है. वह सिंगापुर की नागरिक हैं और टोआ पायोह इलाके में रहती हैं, जो सिंगापुर की सबसे पुरानी और घनी आबादी वाली हाउसिंग कॉलोनियों में से एक है. अदालत में पेशी के दौरान शमला ने स्वीकार किया कि उन्होंने करीब छह महीनों में नौ बार कबूतरों को दाना डाला. इनमें से चार मामलों में उन्होंने अपना जुर्म कबूल किया, जबकि बाकी पांच मामलों को अदालत ने सजा तय करते समय ध्यान में रखा.

पहले भी मिल चुकी है सजा

यह पहला मौका नहीं है जब शमला कानून के शिकंजे में आई हों. रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 में भी उन्हें जंगली पक्षियों को दाना डालने के मामले में 1,200 सिंगापुर डॉलर का जुर्माना लगाया गया था. उस समय उन्होंने अदालत से वादा किया था कि वह दोबारा ऐसा नहीं करेंगी. इतना ही नहीं, उन्होंने नेशनल पार्क्स बोर्ड (NParks) की कबूतर पकड़ने की कार्रवाई में भी बाधा डाली थी. इसके बावजूद जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच उन्होंने फिर से नौ बार कबूतरों को दाना डाला.

अदालत में क्या दलील दी गई

NParks के वकील ने अदालत में कहा कि शमला को पूरी जानकारी थी कि जंगली पक्षियों को दाना डालना कानूनन अपराध है. इसके बावजूद उन्होंने बार-बार नियम तोड़े. वकील ने तर्क दिया कि उनके वादे बेअसर साबित हुए हैं और अब केवल सख्त आर्थिक सजा ही उन्हें रोक सकती है. इसलिए हर मामले में 800 से 1,000 सिंगापुर डॉलर जुर्माने की मांग की गई. शमला अदालत में बिना वकील के पेश हुईं और उन्होंने खुद अपनी बात रखी.

जुर्माना क्यों नहीं हुआ कम

शमला ने अदालत को बताया कि वह बेरोजगार हैं और उनके पास कोई मेडिकल इंश्योरेंस भी नहीं है. उन्होंने गुजारिश की कि जुर्माने की रकम 1,000 से 2,000 सिंगापुर डॉलर के बीच रखी जाए और बाकी रकम वह सामुदायिक सेवा के जरिए पूरी करने को तैयार हैं. हालांकि अदालत ने उनकी दलील को स्वीकार नहीं किया और कुल 3,200 सिंगापुर डॉलर का जुर्माना लगाया. फैसला सुनने के बाद शमला ने कहा कि वह उसी दिन पूरी राशि अदा कर देंगी. अदालत ने साफ किया कि सिंगापुर में सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े कानूनों में बार-बार की गई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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