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Video: कोकीन के नशे जैसा होता है सोशल मीडिया का नशा, कहीं आप भी तो इसके शिकार नहीं ?
फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स का अत्यधिक प्रयोग करने वाले यूजर्स फैसले करने में उतने ही बुरे हो सकते हैं, जितना कोई नशेड़ी होता है
मिशिगन: अगर आपको भी है सोशल मीडिया का एडिक्शन तो फिर ये रिपोर्ट आपके लिए है. क्या आप जानते हैं सोशल मीडिया का असर लोगों पर वैसे ही होता है जैसे नशीले ड्रग्स या कोकीन जैसे मादक पदार्थों का सेवन करने से होता है, ये हम नहीं कह रहे… ये कहना है अमेरिका के मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डार मेशी का, जिन्होंने आम लोगों पर सोशल मीडिया के पड़ने वाले असर को अपने शोध का विषय बनाया और परिणाम के रूप में ये डरा देने व अलर्ट हो जाने वाली रिपोर्ट सामने आई. डार मेशी का कहना है कि “सोशल मीडिया से लोगों को वैसे तो बहुत फायदा होता है, लेकिन इसका एक स्याह पहलू भी है जब लोग इसके इतने लती हो जाते हैं कि खुद को इससे दूर नहीं रख सकते,”
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Thrilled to share our new paper on excessive social media use and decision making! With @AndrewBenderPhD https://t.co/bCbVGSBXM1
— Dar Meshi (@darmeshi) January 10, 2019
यूजर्स किसी जुआरी/नशेड़ी की तरह करते हैं व्यवहार
ये नया शोध चौंकाने वाला खुलासा करता है. इस शोध से पता चलता है कि फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स का अत्यधिक प्रयोग करने वाले यूजर्स फैसले करने में उतने ही बुरे हो सकते हैं, जितना कोई नशेड़ी होता है. असिस्टेंट प्रोफेसर डार मेशी का कहना है कि , “धरती पर करीब एक तिमाही मनुष्य सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं, और इनमें से कुछ लोगों को इसकी गलत लत लग गई है, जो कि इन साइटों के अत्यधिक प्रयोग करने से लगती है.”
AD+PR’s Dar Meshi, Ph.D., finds a connection between social media addiction and risky decision-making, in research that compares heavy social media use to gambling. Read more: https://t.co/DMqi5BTc39 #ComArtSci pic.twitter.com/q0P0RhcBSV
— MSU ComArtSci (@MSUComArtSci) January 10, 2019
मेशी ने कहा, “हमें इस अभियान को बेहतर ढंग से समझने की आवश्यकता है, ताकि हम यह निर्धारित कर सकें कि अत्यधिक सोशल साइट्स के उपयोग को एक लत माना जाना चाहिए.”
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किसी नशेड़ी की तरह ही मुश्किल होता है फेसबुक छोड़ने का फैसला
मेशी और अन्य शोधकर्ताओं ने कुल 71 लोगों के व्यवहार का अध्ययन किया. पहले उनसे कुछ आसान से सवाल पूछे गए, जैसे; जब वो फेसबुक जैसी साइट्स नहीं खोल पाते तो उन्हें कैसा लगता है, उन्हें अगर ये साइट्स छोड़नी पड़े तो उन्हें कैसा लगेगा, इन साइट्स का उनकी पढ़ाई और नौकरी पर क्या असर पड़ रहा है. इसके बाद प्रतिभागियों से आयोवा गैंबलिंग टास्क करवाया गया. इस टास्क का प्रयोग सामान्यत: मनोवैज्ञानिक निर्णय लेने की क्षमता को नापने के लिए करते हैं. यह शोध जर्नल ऑफ बिहेबियर एडिक्शंस में प्रकाशित किया गया है.
इस टास्क को पूरा करने में सोशल मीडिया की लत रखने वाले लोगों ने किसी नशेड़ी की भांति ही सही चयन करने में गलतियां कीं. जिन लोगों ने जितनी अच्छी तरह से टास्क पूरा किया, उन्हें सोशल साइटों की लत उतनी ही कम थी. इसलिए अगर आप भी ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिता रहे हैं तो आपको भी सावधानी बरतने की जरूरत है.
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