कोलंबो: श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने रविवार को साफ कर दिया कि वह प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त किए जा चुके रानिल विक्रमसिंघे को फिर कभी प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त नहीं करेंगे. उन्होंने स्वीकार किया कि अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी विक्रमसिंघे को पद से हटाने के कदम से देश में थोड़ी राजनीतिक अशांति पैदा हुई. उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री के तौर पर विक्रमसिंघे के तीन साल के कार्यकाल की विशेष जांच कराएंगे. उन्होंने कहा कि विक्रमसिंघे की सरकार भ्रष्ट थी.

सिरिसेना ने बीते दि‍नों  विक्रमसिंघे को अचानक प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया और उनकी जगह पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया. सिरिसेना के इस विवादित कदम को कई जानकारों ने असंवैधानिक करार दिया था.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट भी राष्‍ट्रपति के संसद को भंग करने के फैसले को पलट दिया था. संसद में नव नियुक्‍त पीएम महिंदा राजपक्षे को बहुमत नहीं मिला था. इसके बावजूद भी राष्‍ट्रपति अपनी जिद पर अड़े हुए हैं.

कोलंबो में तैनात विदेशी पत्रकारों से बातचीत में सिरिसेना ने कहा, ”इस बात की कोई संभावना नहीं है कि मैं उन्हें (विक्रमसिंघे) फिर से नियुक्त करूंगा.” उन्होंने कहा कि मेरे फैसले के कारण देश में थोड़ी राजनीतिक अशांति है, लेकिन मैं इसे गंभीर राजनीतिक संकट नहीं मानता.

राष्ट्रपति ने कहा कि शासन के तौर-तरीकों को लेकर उनके और विक्रमसिंघे के बीच गंभीर नीतिगत मतभेद थे. उन्होंने कहा, ”पहला मतभेद कैबिनेट की नियुक्ति को लेकर था. विषयों के वैज्ञानिक विभाजन के आधार पर कैबिनेट गठित करने के तौर-तरीकों की सिफारिश करने के लिए मैंने शिक्षाविदों की एक समिति बनाई थी. लेकिन विक्रमसिंघे ने इन सिफारिशों की अनदेखी की.”

सिंगापुर के नागरिक अर्जुना महेंद्रन को केंद्रीय बैंक का गवर्नर नियुक्त करने को लेकर भी सिरिसेना और विक्रमसिंघे के बीच गंभीर मतभेद थे. महेंद्रन विक्रमसिंघे की पसंद थे. सिरिसेना ने कहा, ”मैंने उनसे (विक्रमसिंघे) से कहा कि उन्हें (महेंद्रन को) नियुक्त नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह गैर-श्रीलंकाई हैं. लेकिन उन्होंने उनकी नियुक्ति पर जोर दिया.”

राष्ट्रपति ने कहा कि महेंद्रन देश में हुए सबसे बड़े वित्तीय घोटाले के लिए जिम्मेदार है. एक जांच में महेंद्रन को अपने दामाद से जुड़े एक डीलर को अंदरूनी सूचना देने का दोषी पाया गया था. सिरिसेना ने कहा, ”वह (महेंद्रन) फरार है और रानिल विक्रमसिंघे को उसका ठिकाना पता है.” उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री के तौर पर विक्रमसिंघे के तीन साल के कार्यकाल की विशेष जांच कराएंगे. उन्होंने कहा कि विक्रमसिंघे की सरकार भ्रष्ट थी.