कोलंबो: श्रीलंका के सियासी संकट के बीच वैश्विक दबाव और जन विद्रोह की आशंकाओं को देखते हुए श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने अंततः संसद का निलंबन हटा लिया है और देश में चल रहे मौजूदा गतिरोध को समाप्त करने के लिए सोमवार को विधायिका की बैठक बुलाई है.

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सभी की है नजर
श्रीलंका के आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को इस बाबत जानकारी दी. बता दें कि लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से अचानक हटाए जाने के बाद देश में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था. रानिल विक्रमसिंघे ने भी ट्वीट कर लोकतंत्र की जल्दी बहाली की अपील की थी. वहीँ देश-विदेश से श्रीलंका से लोकतंत्र की बहाली व मानवीय मूल्यों की रक्षा किए जाने की अपील की थी. यूएन व ह्यूमन राइट्स वाच भी श्रीलंका के हालातों पर विशेष नजर रखे हुए है.

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श्रीलंका में 28 अक्टूबर हालत ने तब गंभीर मोड़ ले लिया, जब सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी सीलोन पेट्रोलियम के मुख्यालय में अपदस्थ कैबिनेट के पेट्रोलियम मंत्री अर्जुन राणातुंगे ने अपने कार्यालय में फिर से प्रवेश का प्रयास किया. हालांकि तभी हिंसा भड़क उठी. इस घटना के कारण पूर्व क्रिकेटर रणतुंगा को सोमवार को गिरफ्तार किया गया. विक्रमसिंघे अभी तक प्रधानमंत्री के टेंपल ट्रीज कार्यालय सह निवास में बने हुए हैं. उन्होंने सोमवार को कहा कि उन्हें संसद में बहुमत हासिल है तथा संसद की बैठक होने पर वह इसे साबित कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘कोई भी संसद में हस्तक्षेप नहीं कर सकता.

मकसद जरूरी आंकड़े जुटाना था
राष्ट्रपति सिरिसेना ने गत शुक्रवार को नाटकीय घटनाक्रम में विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से हटाकर उनकी जगह पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया था. सिरिसेना ने 16 नवंबर तक संसद को निलंबित कर दिया था. विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मकसद सांसदों को विक्रमसिंघे के पाले से राजपक्षे के समर्थन में लाने के लिए समय हासिल करना था, ताकि वह 225 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिये 113 का आंकड़ा जुटा सकें. सिरिसेना और संसद के स्पीकर कारू जयसूर्या के बीच कल इस मुद्दे पर चर्चा हुई. सिरिसेना ने बाद में संकेत दिया कि वह अगले सप्ताह संसद का सत्र बुला सकते हैं. (इनपुट एजेंसी)

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