नई दिल्ली: मालदीव में जारी राजनीतिक उठापटक को देखते हुए विरोध तेज हो गया है. इसी के मद्देनजर राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने देश में 15 दिनों का आपातकाल घोषित कर दिया है. मालदीव की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद समेत जेल में बंद 12 नेताओं को तुरंत रिहा करने का आदेश न मानने के बाद राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं. Also Read - चीन के व्यापार पर भारत सरकार का एक और दाव, निर्यात होने वाले LED उत्पादों की बढ़ाई गई निगरानी

देश में मौजूदा हालात को देखते किसी तरह की अप्रिय घटना के भय से भारत सरकार की ओर से मालदीव में रह रहे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय किसी तरह के सार्वजनिक समारोह में शामिल होने में सतर्कता बरतें और जरूरी न हो तो यात्राएं न करें. Also Read - अमेरिका ने हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी के मुकाबले के लिए मालदीव के साथ की डिफेंस डील

मालदीव की सेना ने रविवार को राजनीतिक उठापटक के बाद संसद परिसर को घेर लिया. देश के संसदीय सचिव के इस्तीफे के बाद विपक्षी सांसद संसद परिसर में घुसने की कोशिश कर रहे थे जिसके कारण सेना को यह कदम उठाना पड़ा. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, भारी मात्रा में सैनिकों की तैनाती के बाद भी कुछ विपक्षी सांसदों को परिसर में घुसने की अनुमति दी गई. संसदीय सचिव जनरल अहमद मोहम्मद ने बिना कोई कारण बताए रविवार की सुबह अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

मालदीव की सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद समेत जेल में बंद अन्य नेताओं को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया था जिसे राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने मानने से इंकार कर दिया. इसके बाद से देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.

स्थानीय मीडिया के अनुसार, मालदीव की सरकार ने रविवार को कहा कि देश की शीर्ष अदालत राष्ट्रपति यामीन को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करवाना चाहती है और सेना इस बात पर जोर दे रही है कि ऐसे आदेशों को लागू नहीं किया जा सकता.

सेना और पुलिस प्रमुख के साथ रविवार को बैठक के बाद महान्यायवादी मोहम्मद अनिल ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार को जानकारी मिली है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति यामीन को गिरफ्तार करने का आदेश दिया जाने वाला है.वहीं महान्यायवादी ने इस कदम को ‘असंवैधानिक’ बताया और कहा कि पुलिस और सेना सर्वोच्च न्यायालय के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने के किसी भी आदेश को अस्वीकार कर देगी.

बता दें देश में सबसे पहले लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए नेता नशीद ने 2008 में सत्ता संभाली थी. लेकिन फरवरी 2012 में तख्तापलट करते हुए उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया गया. इसके बाद 2015 में आतंकवाद के आरोपों में उन्हें 13 साल कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद से मालदीव में अशांति का माहौल है. नशीद को 2016 में ब्रिटेन ने राजनीतिक शरण दी थी. नशीद ने इस फैसले के बाद गयूम को इस्तीफा देने को कहा है. साथ ही वह माले वापस लौटने की तैयारी में हैं.