लंदन: ब्लैक होल और बिग बैंग सिद्धांत को समझने में अहम योगदान देने वाले महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का रविवार को कैंब्रिज शहर में अंतिम संस्कार कर दिया गया. विश्व के मशहूर वैज्ञानिकों और लेखकों में से एक हॉकिंग ने 14 मार्च को 76 वर्ष की उम्र में अपने कैंब्रिज स्थित घर में आखिरी सांस ली थी. अब खबर है कि हॉकिंग जिस हाई टेक्निक वाली व्हीलचेयर का इस्तेमाल करते थे, उसे और कम्प्यूटर से तैयार उनकी आवाज ज्यादा को संरक्षित करके रखा जाएगा.Also Read - renowned scientist stephen hawking will be cremated in cambridge | कैंब्रिज में होगा महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का अंतिम संस्कार

द संडे टाइम्स के मुताबिक, वैज्ञानिक के परिवार को उम्मीद है कि उनके व्हीलचेयर और आवाज प्रणाली से उनकी यादें जिंदा रहेंगी और संग्रहालय इसे संभाल कर रख सकते हैं. इस विचार पर भी काम किया जा रहा है कि लंदन में साइंस म्यूजियम हॉकिंग के जीवन पर प्रदर्शनी का आयोजन करे जिसमें उनमें दो में से एक व्हीलचेयर तथा उनके लेक्चर की रिकॉर्डिंग लोगों को दिखाई जाए. Also Read - stephen hawkings last research claims the presence of many cosmos | जाते-जाते एक और रहस्य का खुलासा कर गए स्टीफन हॉकिंग

कम्प्यूटर इंजीनियरों को 33 वर्ष पुराने सिंथेजाइजर को पुनर्बहाल करने में चार वर्ष का समय लग गया जिसने हॉकिंग के रोबोटिक आवाज पैदा की. कैंब्रिज विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विशेषज्ञ पीटर बेनी ने अखबार से कहा, ‘‘हमने नई प्रणाली 26 जनवरी को व्हीलचेयर में लगाई थी.’’ Also Read - Film celebs condole death of Famous Theoretical Physicist Stephen Hawking | स्टीफन हॉकिंग के निधन पर उदास हुआ बॉलीवुड, कहा- विज्ञान भी ग़मज़दा होगा

हॉकिंग का जन्म इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में 8 जनवरी, 1942 को हुआ था. ठीक इसी दिन महान खगोलज्ञ गैलिलियो गैलीली की 330 वीं पुण्यतिथि थी. हॉकिंग को स्नायु संबंधी बीमारी (एम्योट्रॉपिक लेटरल स्लेरोसिसस) थी, जिसमें व्यक्ति कुछ ही वर्ष जीवित रह पाता है. उन्हें यह बीमारी 21 वर्ष की आयु में 1963 में हुई और शुरूआत में डॉक्टरों ने कहा कि वह कुछ ही वर्ष जीवित रह सकेंगे. जुझारू हॉकिंग अपनी बीमारी का पता लगने के बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ने चले गए और अल्बर्ट आइंस्टिन के बाद वह दुनिया के सबसे महान भौतिकीविद बने.

स्टीफन के पास 12 मानद डिग्रियां थी और उन्हें अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया था. हमेशा व्हील चेयर पर रहने वाले हॉकिंग किसी भी आम इंसान से अलग दिखते थे. कम्प्यूटर और विभिन्न उपकरणों के जरिए अपने शब्दों को व्यक्त कर उन्होंने फिजिक्स के कई सफल प्रयोग भी किए हैं.

उनका कहना था ‘मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई. मुझे खुशी है कि मैं इस पर किए गए शोध में अपना योगदान दे पाया. मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है. मेरा दिमाग लगभग सभी मांसपेशियों से मेरा नियंत्रण खो चुका है और अब मैं अपने गाल की मांसपेशी के जरिए, अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कम्प्यूटर से जोड़कर ही बातचीत करता हूं.’

हॉकिंग ने ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझने में अहम भूमिका निभाई थी. यूनिवर्सिटी ऑफ केम्ब्रिज में गणित और सैद्धांतिक भौतिकी के प्रोफेसर रहे स्टीफन हॉकिंग की गिनती आईंस्टीन के बाद सबसे बड़े भौतकशास्त्रियों में होती थी. स्टीफन हॉकिंग का जन्म इंग्लैंड में आठ जनवरी 1942 को हुआ था.