नई दिल्ली: विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टाफन हॉकिंग और बेस्टसेलर रही किताब ‘अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ में शारीरिक अक्षमताओं के बारे में जिक्र किया था. उन्होंने साबित कर दिखाया कि अगर इच्छा शक्ति हो तो व्यक्ति कुछ भी कर सकता है. उन्होंने ब्लैक होल और बिग बैंग सिद्धांत को समझने में अहम योगदान दिया था. स्टीफन के पास 12 मानद डिग्रियां थी और उन्हें अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया था. हमेशा व्हील चेयर पर रहने वाले हॉकिंग किसी भी आम इंसान से अलग दिखते थे. कम्प्यूटर और विभिन्न उपकरणों के जरिए अपने शब्दों को व्यक्त कर उन्होंने फिजिक्स के कई सफल प्रयोग भी किए हैं.Also Read - Stephen Hawking wheelchair will be preserved in museum । म्यूजियम में सहेज कर रखी जाएगी स्टीफन हॉकिंग की हाईटेक व्हीलचेयर

ब्रह्मांड के रहस्‍यों को सुलझाने वाले वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग का निधन Also Read - renowned scientist stephen hawking will be cremated in cambridge | कैंब्रिज में होगा महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का अंतिम संस्कार

Also Read - stephen hawkings last research claims the presence of many cosmos | जाते-जाते एक और रहस्य का खुलासा कर गए स्टीफन हॉकिंग

उनका कहना था ‘मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई. मुझे खुशी है कि मैं इस पर किए गए शोध में अपना योगदान दे पाया. मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है. मेरा दिमाग लगभग सभी मांसपेशियों से मेरा नियंत्रण खो चुका है और अब मैं अपने गाल की मांसपेशी के जरिए, अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कम्प्यूटर से जोड़कर ही बातचीत करता हूं.’

हॉकिंग ने ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझने में अहम भूमिका निभाई थी. यूनिवर्सिटी ऑफ केम्ब्रिज में गणित और सैद्धांतिक भौतिकी के प्रोफेसर रहे स्टीफन हॉकिंग की गिनती आईंस्टीन के बाद सबसे बड़े भौतकशास्त्रियों में होती थी. स्टीफन हॉकिंग का जन्म इंग्लैंड में आठ जनवरी 1942 को हुआ था.

बिग बैंग सिंद्धांत

ब्रह्मांड का जन्म एक महाविस्फोट के परिणामस्वरूप हुआ. इसी को महाविस्फोट सिद्धान्त या बिग बैंग सिद्धान्त कहते हैं. जिसके अनुसार से लगभग बारह से चौदह अरब वर्ष पूर्व संपूर्ण ब्रह्मांड एक परमाण्विक इकाई के रूप में था. उस समय मानवीय समय और स्थान जैसी कोई अवधारणा अस्तित्व में नहीं थी. महाविस्फोट सिद्धांत के अनुसार लगभग 13.7 अरब वर्ष पूर्व इस धमाके में अत्यधिक ऊर्जा का उत्सजर्न हुआ. यह ऊर्जा इतनी अधिक थी जिसके प्रभाव से आज तक ब्रह्मांड फैलता ही जा रहा है.

सारी भौतिक मान्यताएं इस एक ही घटना से परिभाषित होती हैं जिसे महाविस्फोट सिद्धांत कहा जाता है. महाविस्फोट नामक इस महाविस्फोट के धमाके के मात्र 1.43 सेकेंड अंतराल के बाद समय, अंतरिक्ष की वर्तमान मान्यताएं अस्तित्व में आ चुकी थीं. भौतिकी के नियम लागू होने लग गये थे. 1.34 वें सेकेंड में ब्रह्मांड 1030 गुणा फैल चुका था और क्वार्क, लैप्टान और फोटोन का गर्म द्रव्य बन चुका था. 1.4 सेकेंड पर क्वार्क मिलकर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन बनाने लगे और ब्रह्मांड अब कुछ ठंडा हो चुका था. हाइड्रोजन, हीलियम आदि के अस्तित्त्व का आरंभ होने लगा था और अन्य भौतिक तत्व बनने लगे थे.

ब्लैक होल सिद्धांत

ब्लैक होल ऐसी खगोलीय वस्तु होती है जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता है कि प्रकाश सहित कुछ भी इसके खिंचाव से बच नहीं सकता है. ब्लैक होल के चारों ओर एक सीमा होती है जिसे घटना क्षितिज कहा जाता है, जिसमें वस्तुएं गिर तो सकती हैं परन्तु बाहर कुछ भी नहीं आ सकता. इसे “ब्लैक (काला)” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है और कुछ भी परावर्तित नहीं करता. ब्लैक होल का क्वांटम विश्लेषण यह दर्शाता है कि उनमें तापमान और हॉकिंग विकिरण होता है.

अपने अदृश्य भीतरी भाग के बावजूद, एक ब्लैक होल अन्य पदार्थों के साथ अन्तः-क्रिया के माध्यम से अपनी उपस्थिति प्रकट कर सकता है. एक ब्लैक होल का पता तारों के उस समूह की गति पर नजर रख कर लगाया जा सकता है जो अन्तरिक्ष के खाली दिखाई देने वाले एक हिस्से का चक्कर लगाते हैं. वैकल्पिक रूप से, एक साथी तारे से आप एक अपेक्षाकृत छोटे ब्लैक होल में गैस को गिरते हुए देख सकते हैं. यह गैस सर्पिल आकार में अन्दर की तरफ आती है, बहुत उच्च तापमान तक गर्म हो कर बड़ी मात्रा में विकिरण छोड़ती है जिसका पता पृथ्वी पर स्थित या पृथ्वी की कक्षा में घूमती दूरबीनों से लगाया जा सकता है. इस तरह के अवलोकनों के परिणाम स्वरूप यह वैज्ञानिक सर्व-सम्मति उभर कर सामने आई है कि, यदि प्रकृति की हमारी समझ पूर्णतया गलत साबित न हो जाये तो, हमारे ब्रह्मांड में ब्लैक होल का अस्तित्व मौजूद है.