होर्मुज में 3 जहाजों पर हमला, कतर ने ईरान पर लगाया बड़ा आरोप; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

होर्मुज में बीते 24 घंटे में तीन टैंकरों पर हमला हुआ. कतर ने एक जहाज पर हुए हमले के लिए ईरान पर आरोप लगाया. इस खबर में जानिए घटना की पूरी जानकारी.

Written by: Gargi Santosh
Published: July 7, 2026, 11:27 PM IST
  • पिछले 24 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट में तीन टैंकरों पर हमला हुआ
  • कतर के एक LNG टैंकर को UAV (ड्रोन) से निशाना बनाया गया
  • हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं, लेकिन जहाजों को नुकसान पहुंचा
  • घटना के बाद खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी

Hormuz Strait: दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट में पिछले 24 घंटों के दौरान तीन टैंकरों पर हमला हुआ, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई. ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के मुताबिक, एक टैंकर को ड्रोन (UAV) से निशाना बनाया गया, जिससे उसे मामूली नुकसान पहुंचा. राहत वाली बात यह रही कि इस हमले में किसी भी चालक दल के सदस्य के हताहत होने की खबर नहीं है. इससे पहले भी इसी इलाके में दो अन्य जहाजों पर हमले की जानकारी सामने आई थी. इनमें से एक जहाज को नुकसान पहुंचा, जबकि दूसरे में आग लग गई थी.

कतर ने हमले को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कतर के एलएनजी (LNG) टैंकर अल रेकय्यात पर हुए हमले की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजर रहे जहाज को निशाना बनाना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर सीधा हमला है. कतर ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

दूसरी ओर, ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा कि संबंधित जहाज ने चेतावनी की अनदेखी की थी. लेकिन ईरान ने आधिकारिक तौर पर हमले की जिम्मेदारी नहीं ली. वहीं कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में ईरान पर संदेह जताया जा रहा है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी पड़ सकता है असर

इन घटनाओं के बीच, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य बनाने के साथ-साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी चर्चा चल रही थी. हालांकि, मौजूदा हालात के कारण बातचीत फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी है. क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना दिया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर रहेगी. क्योंकि होरमुज़ जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है.

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