नवाज शरीफ को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को पीएमएल-एन के अध्यक्ष पद से हटा दिया. पनामा पेपर्स में नाम आने के बाद नवाज ने पीएम पद से इस्तीफा दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने ही नवाज को अयोग्य ठहराया था. सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने कहा कि आर्टिकल 62 और 63 के तहत अयोग्य करार दिया गया व्यक्ति किसी सियासी पार्टी का प्रमुख नहीं रह सकता.

पाकिस्तान के चीफ जस्टिस मियां साकिब निसार की बेंच ने ये फैसला विवादित इलेक्शन एक्ट 2017 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाया. इलेक्शन एक्ट 2017 के जरिए नवाज शरीफ को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन का प्रमुख बने रहने का रास्ता साफ हो गया था. सुप्रीम कोर्ट में इमरान खान की तहरीक ए इंसाफ, पीपीपी, मुस्लिम अवामी लीग ने याचिका दाखिल की थी.

जुलाई 2017 में दिया था नवाज ने इस्तीफा

शरीफ ने जुलाई में प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पनामा पेपर्स मामले में अघोषित आय को लेकर अयोग्य ठहरा दिया था. ये मामले एनएबी ने आठ सितंबर 2017 को अदालत में शरीफ, उनके बच्चे और दामाद के खिलाफ दर्ज किए थे. शरीफ ने उन्हें अयोग्य ठहराये जाने का बदला इस साल के आम चुनाव में लेने और उन्हें अपदस्थ करने वालों को जवाबदेह बनाने का ऐलान किया था.

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18 फरवरी को ही खबर आई थी कि पाकिस्तान की भ्रष्टाचार निरोधी संस्था ने यहां जवाबदेही अदालत को सूचित किया कि अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिवार ने 18 साल पहले 5.8 करोड़ रुपये की जायदाद घोषित की थी. एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक एनएबी ने कहा कि आरोपियों के टैक्स रिकॉर्ड से उनकी घोषित संपत्ति की कुल कीमत 2000-01 में 5,940,870 रुपये और 64,984 अमेरिकी डॉलर थी.

अखबार ने कहा था कि एनबीए के अध्यक्ष ने कहा कि शरीफ ने अल-अजीजिया स्टील मिल्स और हिल मेटल इस्टेब्लिशमेंट का अधिग्रहण किया था लेकिन यह उनकी आय के ज्ञात स्रोत से ज्यादा पाया गया है.