काबुल: तालिबान ने सोमवार को कहा कि वह आंशिक संघर्ष विराम खत्म करने के साथ ही अफगान सुरक्षा बलों के खिलाफ आक्रामक अभियान फिर शुरू करने जा रहा है. इस आंशिक संघर्ष विराम की घोषणा चरमपंथियों और वाशिंगटन के बीच समझौते पर दस्तखत होने से पहले की गई थी. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, “हिंसा में कटौती…अब खत्म हो गयी है और हमारा अभियान सामान्य रूप से जारी रहेगा.” उन्होंने कहा, “समझौते (अमेरिका-तालिबान) के मुताबिक, हमारे मुजाहिदीन विदेशी बलों पर हमला नहीं करेंगे लेकिन काबुल के प्रशासन वाले बलों के खिलाफ हमारा अभियान जारी रहेगा.” Also Read - कोरोना वायरस: बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका और अफगानिस्तान जाएगी भारतीय सेना, इस तरह करेगी मदद

बता दें कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने रविवार को कहा था कि वह हजारों तालिबान कैदियों को रिहा नहीं करेंगे. अमेरिका-तालिबान शांति समझौते में रखे गये तालिबान कैदियों की रिहाई के प्रावधान को लेकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से असहमति जताई. राष्ट्रपति गनी की इस टिप्पणी को इस समझौते के लिए पहली अड़चन माना जा रहा था. जो सही साबित हुआ. Also Read - कोरोना से जंग में अफगानिस्तान की मदद के लिए भारत ने भेजी दवाएं वअन्‍य राहत सामग्री, अशरफ गनी ने कहा- शुक्रिया

दरअसल समझौते में सभी विदेशी बलों को वापस बुलाने के लिए 14 माह का समय तय किया गया है बशर्ते तालिबान कई प्रतिबद्धताओं का पालन करे तथा अधिक समावेशी शांति समझौते के लिए काबुल के साथ वार्ता करे. शनिवार को अमेरिका-तालिबान के बीच हुए समझौते में अफगान सरकार द्वारा पांच हजार तालिबान कैदियों की रिहाई की बात थी. तालिबान 1,000 कैदियों को रिहा करेगा. Also Read - तबलीगी जमात का जुर्म तालिबानी है, माफ नहीं किया जा सकता: मुख़्तार अब्बासी नकवी

गनी ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में रविवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि किसी भी कैदी की रिहाई उनकी सरकार द्वारा लिये जाने वाला एक निर्णय है और वह बातचीत शुरू होने से पहले कैदियों को रिहा करने के लिए तैयार नहीं थे. गनी ने कहा, ‘‘कैदियों की रिहाई के लिए अमेरिका ने अनुरोध किया था और यह वार्ता का हिस्सा हो सकता है लेकिन यह एक पूर्व शर्त नहीं हो सकती है.’’

(इनपुट भाषा)