काबुल: अफगानिस्तान में सुरक्षा बलों और तालिबान के बीच भयंकर संघर्ष छिड़ा हुआ है. ये लड़ाई एक प्रमुख प्रांतीय राजधानी पर कब्जे को लेकर सरकारी बलों और तालिबान के बीच चार दिन की भीषण लड़ाई में 100 से ज्यादा अफगान पुलिस कर्मियों और सैनिकों की मौत हुई है. इसके अलावा लड़ाई में कम से कम 20 आम लोगों की भी जान गई है. वहीं, सरकार ने दावा किया है
कि तालिबान के 12 नेताओं समेत 194 विद्रोही मारे गए हैं. रक्षा मंत्री बहरामी ने यह भी कहा कि तालिबान के 194 विद्रोही मारे गए हैं. मृतकों में पाकिस्तानी, चेचेन और अरब के विदेशी लड़ाके शामिल हैं.

तालिबान ने पिछले शुक्रवार को गजनी प्रांत की राजधानी गजनी पर हमला कर दिया था. इसके बाद पहली बार हताहतों की आधिकारिक संख्या जनरल तारीक शाह बहरामी ने दी है. कई छोर से किए हमले के बाद बागियों ने शहर के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया. यह तालिबान की ओर से बड़ी शक्ति का प्रदर्शन है जो नेशनल कैपिटल काबुल से महज 120 किलोमीटर दूर स्थित शहर के इतने अंदर तक घुस गया है. अमेरिका ने अफगान बलों की मदद के लिए सैन्य सलाहकारों को भेजा है.

अगर 270,000 आबादी वाला गजनी हाथ से निकल जाता है तो यह तालिबान के लिए बड़ी जीत होगी. यह दक्षिणी प्रांतों से काबुल को जोड़ने वाले एक अहम राजमार्ग से भी संपर्क तोड़ देगा.

अतिरिक्त सैनिकों को भेजा
रक्षा मंत्री बहरामी ने काबुल में प्रेस कॉफ्रेंस में सोमवार को बताया कि हताहतों की संख्या सटीक नहीं है और इसमें बदलाव हो सकता है. उधर गृह मंत्री वसी अहमद बरमाक ने बताया कि मृतकों में करीब 70 पुलिसकर्मी शामिल हैं. बहरामी ने कहा कि गजनी को तालिबान के हाथों में जाने से रोकने में मदद के लिए तकरीबन 1000 अतिरिक्त सैनिकों को शहर में भेजा गया है.रक्षा मंत्री बहरामी ने यह भी कहा कि तालिबान के 12 नेताओं समेत 194 विद्रोही मारे गए हैं. मृतकों में पाकिस्तानी, चेचेन और अरब के विदेशी लड़ाके शामिल हैं.
संपर्क कटा, संचार ठप
तालिबान ने शहर के बाहरी हिस्से में स्थित एक टेलीफोन टावर को तबाह कर दिया. इससे सभी लैंडलाइन और मोबाइल फोनों का संपर्क टूट गया है. इससे भी लड़ाई के विवरण की पुष्टि करने में दिक्कत हो रही है. अफगान अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि शहर को तालिबान के हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा और वहां पर सरकारी ठिकानों और अन्य संस्थाओं पर अफगान
बलों का ही नियंत्रण है.

पाकिस्तान और चेचेन्या के लड़ाकें तालिबानों के साथ
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता नजीब दानिश ने सोमवार को पहले बताया था कि बचे हुए तालिबानियों का खात्मा करने के लिए अतिरिक्त बल गजनी भेजे गए हैं. प्रांत के पुलिस प्रमुख कर्नल फरीद मशाल ने बताया कि विद्रोहियों की ओर से लड़ने वाले अधिकतर लड़ाके विदेशी हैं, जिनमें पाकिस्तान और चेचन्या के लड़ाके भी शामिल हैं. मशाल ने कहा कि तालिबान अपने मकसद को हासिल करने में विफल रहा है.

खास बातें 

– पिछले कुछ महीनों के दौरान तालिबान ने देश के कई जिलों पर कब्जा किया है
– तकरीबन रोज ही अफगान सुरक्षा बलों पर हमला किया है, लेकिन शहरी इलाकों पर कब्जा करने में नाकाम रहा था
– अमेरिका और नाटो ने 2014 के अंत में अफगानिस्तान में अपना जंगी मिशन औपचारिक तौर पर बंद कर दिया था.
– अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के मानवीय संयोजक रिक पीपरकोर्न ने कहा कि शुक्रवार सुबह से गजनी के निवासियों ने अपने शहर को युद्ध भूमि में बदलते देखा है
– लड़ाई अब भी चल रही है. हमें हताहत आम लोगों की संख्या के बारे में शुरुआती रिपोर्टें मिली हैं
– लोग शहर के बाहर सुरक्षित इलाकों में जाने की कोशिश कर रहे हैं.
– इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स और अफगान इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने एक संयुक्त बयान में गजनी में हिंसा और वहां पत्रकारों पर हमलों की निंदा की है.