माइ साई। 17 दिन बाद थाईलैंड में गुफा में फंसे 12 फुटबॉलर बच्चे और कोच सुरक्षित बाहर आ गए. इन 13 लोगों के साहस की हर तरफ तारीफ हो रही है. लेकिन इस मामले में असली नायक बनकर उभरे कोच अब भी इस देश की नागरिकता का इंतजार कर रहा है. टीम के फुटबाल कोच एक्कापोल चांतावांग थाईलैंड गुफा मामले में नायक बनकर उभरे हैं लेकिन वह पानी से लबालब गुफा में कई दिन फंसी रही फुटबाल टीम से जुड़े उन सदस्यों में शामिल हैं जिनके पास थाईलैंड की नागरिकता तक नहीं है.

17 दिन गुफा में फंसे रहे थे

‘वाइल्ड बोअर्स ’टीम के युवा फुटबालर और कोच कई दिन गुफा में फंसे रहने के बाद जीवित बाहर निकले थे. कल गुफा से अंत में निकलने वालों में 25 साल के कोच एक्कापोल शामिल थे. उनकी प्रशंसा विशेष रूप से इस बात के लिये हो रही है कि वह 11 से 16 साल के युवा फुटबालरों को अंधेरे में निरंतर बढ़ती भूख के बीच शांत रखने में कामयाब रहे.

4 लाख 80 हजार लोगों के पास नागरिकता नहीं

दरअसल , संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने कहा कि थाईलैंड में करीब चार लाख 80 हजार ऐसे लोग हैं जिनके पास देश की नागरिकता नहीं है. इनमें से कई लोग घुमंतू पर्वतीय आदिवासी और अन्य जातीय समूहों का हिस्सा हैं जो सदियों से माइ साई के आसपास रह रहे हैं. यह जगह थाईलैंड, म्यामां, लाओस और चीन की सीमा से लगे कानून रहित इलाके स्वर्णिम त्रिभुज के बीचोंबीच स्थित है.

17 दिनों की जद्दोजहद के बाद आखिरकार गुफा से निकाले गए सभी 12 बच्चे और कोच

क्लब के संस्थापक नोप्पाराट खानथावांग ने कहा कि नागरिकता विहीन लोगों में फुटबाल कोच एक्कापोल के अलावा तीन युवा फुटबालर डुल, मार्क और टी भी शामिल हैं जो कोच के साथ गुफा में फंस गये थे. उन्होंने कहा, लड़कों के लिए नागरिकता हासिल करना सबसे बड़ी आशा है. इन लड़कों को चियांग राइ से बाहर मैच खेलने के लिये यात्रा में समस्याएं होती रही हैं. पासपोर्ट के बिना उनके अगले सत्र में मैनचेस्टर यूनाइटेड एफसी से मिले आमंत्रण पर जाने की संभावना नहीं है.

मौत और जिंदगी का खेल

बता दें कि 17 दिन की जद्दोजहद के बाद 12 बच्चों और कोच समेत 13 लोगों को बचावकर्मियों ने कामयाबी के साथ गुफा से बाहर निकाल लिया था. ये लोग 23 जून को गुफा के अंदर गए थे लेकिन अचानक भारी बारिश के कारण अंदर ही फंस गए और चारों तरफ पानी भर गया. दुनियाभर के विशेषज्ञों ने बचाव अभियान में अपना योगदान दिया. इनके बचने की उम्मीद बहुत कम बताई जा रही थी क्योंकि चारों तरफ पानी भर गया था जिसे निकालने में बेहद मुश्किल हो रही थी. बचाव अभियान के दौरान एक कमांडो की पानी में डूबकर मौत भी हो गई. लेकिन बचावदल के कर्मचारियों ने जज्बा दिखाते हुए सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.