लखनऊ: ‘भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भाषण देने की शैली इतनी जबरदस्त थी कि उन्हें सुनने के लिए हजारों लोग रैलियों में पहुंचते थे.’ कुछ इन शब्दों में द गार्जियन अखबार ने भारत रत्न वाजपेयी जी को अपनी श्रद्धांजलि दी. अटल बिहारी के निधन से एक युग का अवसान हो गया. अटल अजातशत्रु थे, चंहु ओर लोकप्रिय सब उनके मित्र थे, शत्रु तो कोई उनका जन्मा ही नहीं. Also Read - ट्रंप और र‍िपोर्टर के बीच तीखी नोकझोंक, प्रेस पास सस्‍पेंड करने पर CNN ने कहा- लोकतंत्र को खतरा

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वाजपेयी जी का कद अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर भी कितना विशाल था इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विदेशी मीडिया ने उन्हें एक वृहद् श्रद्धांजलि दी है. द गार्जियन सहित द वाशिंगटन पोस्ट, द न्यूयॉर्क टाइम्स, सीएनएन, कनेडियन सीबीसी न्यूज ने अपने पृष्ठों पर वाजपेयी जी को भारत को एक परमाणु शक्ति सम्पन्न देश बनाने और भारत-अमेरिका के रिश्तों को मजबूत बनाने का श्रेय देते हुए याद किया है.

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द वाशिंगटन पोस्ट द वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि वाजपेयी जी ने अपनी करिश्माई शख्शियत ने बीजेपी को राष्ट्रीय पार्टी बनाया. उनके प्रधानमन्त्रित्व काल में भारत कूटनीतिक रूप से सफल परमाणु परीक्षण किया. हालांकि इससे भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव आ गये लेकिन वाजपेयी जी के प्रयासों से दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत शुरु हुई और दो दशकों बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में बिल क्लिन्टन की भारत यात्रा संभव हो पाई.

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सीएनएन के हवाले से सीएनएन ने भी परमाणु परीक्षण को बिना अन्तर्राष्ट्रीय दबाव में आये सफलता से करना, वाजपेयी जी की सरकार की उपलब्धि के रूप में माना है. सीएनएन लिखता है कि उस समय जब भारत पर आर्थिक लगाये गये थे, वाजपेयी जी ने एक भाषण में कहा था कि, ‘हमने कभी भी अन्तर्राष्ट्रीय दबाव में आकर कोई फैसला नही किया है और न ही भविष्य में करेंगें.’

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द न्यूयॉर्क टाइम्स द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा है कि वाजपेयी एक लोकप्रिय कवि, कानून और पत्रकारिता के जानकार थे. उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भी संघर्ष में भाग लिया. हालांकि अपने पहले 50 सालों में उन्हें ज्यादा पहचान नहीं मिली लेकिन बाद के सालों में वो एक विविधता भरे देश में एक पिता के समान आदरणीय माने जाते थे.

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सीबीसी न्यूज कनेडियन सीबीसी न्यूज ने लिखा है कि कभी पत्रकार रहे वाजपेयी राजनीतिक विरोधाभास का संगम थे. वो हिन्दू राष्ट्रवाद के उदारवादी नेता थे. जीवन भर कवि रहे वाजपेयी को प्रकृति से प्यार था पर साथ ही उन्होंने भारत को एक आर्थिक शक्ति के रूप में उठने में भी मार्गदर्शन किया.