वाशिंगटन: अमेरिका स्थित एक मुहाजिर संगठन ने ट्रंप प्रशासन से अनुरोध किया है कि वह कराची और मुहाजिरों के मुद्दे पाकिस्तान सरकार के समक्ष बुलंद करे तथा समुदाय के उत्पीड़न को खत्म करने के लिए हर संभव कदम उठाए. मुहाजिर उर्दू-भाषी लोग हैं जो विभाजन के दौरान 1947 में भारत छोड़ कर पाकिस्तान आकर बस गए थे. अधिकतर मुहाजिर सिंध प्रांत में बसे हुए हैं.

‘साउथ एशिया माइनॉरिटी फाउंडेशन’ के प्रमुख एवं ‘वॉयस ऑफ कराची’ के अध्यक्ष नदीम नुसरत ने दक्षिण एशिया मामलों के अमेरिकी सहायक मंत्री एलिस वेल्स, लोकतंत्र एवं मानवाधिकार ब्यूरो के सहायक मंत्री रॉबर्ट डेस्ट्रो को लिखे पत्र में ये बातें कहीं.

नुसरत ने कहा, ‘पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के लिए धार्मिक चरमपंथियों का समर्थन करना पिछले कई वर्षों से सबसे लुभावना काम रहा है और अमेरिकी करदाताओं के पैसे का इस कुत्सित कार्य में लगातार इस्तेमाल किया जाता रहा है.’

उन्होंने कहा, ‘दक्षिण एशिया में खासकर अफगानिस्तान में सुरक्षा मुद्दों का वास्तविक समाधान तलाशने के लिए अमेरिका को क्षेत्र में विश्वस्त सहयोगी की आवश्यकता है. मैं एक बार यहां दोहराना चाहूंगा कि कराची एवं सिंध प्रांत के अन्य शहरी इलाकों में रह रहे उर्दू भाषी मुहाजिर क्षेत्र में अमेरिका के सबसे बेहतर सहयोगी हैं, जो क्षेत्र में लंबे समय तक अमन बनाए रखने में आपकी नीतियों का समर्थन करेंगे.’

(इनपुट-भाषा)