चौथी बार जर्मनी की चांसलर बनेंगी एंजेला मर्केल, इन पांच बातों ने बनाया करिश्माई नेता

एंजेला मर्केल के चौथी बार जर्मनी का चांसलर बनने का रास्ता साफ है, कम नहीं थी चुनौतियां

Published: September 25, 2017, 7:48 PM IST

बर्लिन। एंजेला मर्केल ने एकबार फिर इतिहास दोहरा दिया है. वो चौथी बार जर्मनी की चांसलर बनेंगी. देश के आम चुनावों में जीत हासिल करते हुए उन्होंने एकबार फिर अपने करिश्माई व्यक्तित्व का लोहा मनवाया है. हालांकि, उनकी यह जीत उतनी आसान नहीं रही. इस बार शरणार्थी संकट, बेरोजगारी और हिचकोले खाती देश की अर्थव्यवस्था जैसे कुछ ऐसे मुद्दे थे, जो मर्केल की उम्मीदों पर पानी फेर सकते थे. माना जाता है कि जर्मनी की ‘आयरन लेडी’ ने कभी दबना नहीं सीखा. हम आपको बताने जा रहे हैं मर्केल की वो बातें जिसने उनकी ज़िंदगी को  बेहद खास बना दिया।

अकेले परिवर्तन लाने का माद्दा
एंजेला विश्व की एकमात्र ऐसी महिला नेता हैं, जो अपने बूते परिवर्तन लाने का माद्दा रखती हैं. वह कई मायनों में दुनिया के अगुवा पुरुष नेताओं को भी पीछे छोड़ देती हैं. उन्हें जमीन से जुड़ी हुई नेता के तौर पर देखा जाता है, जो हर चीज पर कड़ा होमवर्क करती हैं. पिछले दशकों में देखा गया है कि एंजेला हर मुद्दे पर अपने विचार रखती हैं और उनपर अडिग भी रहती हैं.

मर्केल ने अमेरिका से भी लिया पंगा
एंजेला साल 2000 से क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन पार्टी से जुड़ी थीं और 2005 में देश की पहली महिला चांसलर बनीं. उन्होंने ने साल 2013 में अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी पर फोन टैप करने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी. वह यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने यूरोपीय सम्मेलन में अमेरिका पर तंज कसते हुए कहा था, “दोस्तों में जासूसी कभी स्वीकार नहीं की जाती.”

विरासत में मिले राजनीतिक गुर
एंजेला को राजनीतिक गुर विरासत में मिले हैं. उनकी मां सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य थीं, जो महिलाओं के मुद्दे पर काफी मुखर थीं. यही गुर एंजेला में भी हैं. वह महिलाओं की समस्याओं को कभी नजरअंदाज नहीं करतीं और महिला वर्ग में उनकी अच्छी पैठ होने का यही कारण है.

इस चुनाव में थी ढेरों चुनौतियां
एंजेला मर्केल अपने मुद्दों पर अडिग रहने वाली महिला हैं चाहे इसके लिए उन्हें भले ही नुकसान झेलना पड़े. शरणार्थी संकट पर उनका सख्त रवैया भी कुछ ऐसा ही फैसला था. शरणार्थी मुद्दे पर उनके फैसले से जनता के एक बड़े वर्ग में रोष था, लेकिन इस नाराजगी के बावजूद वह अपने फैसले से डिगीं नहीं. जनाधार घटने के बावजूद एंजेला का जादू एक बार फिर चला है. वह इतनी असरदार नेता हैं कि उन्होंने देश की राजनीति में किसी भी सशक्त नेता को उभरने का मौका ही नहीं दिया.

मार्गरेट थैचर से मिलती-जुलती है थैचर की ज़िंदगी
मर्केल की ज़िंदगी की दास्तां कुछ हद तक मार्गरेट थैचर से मिलती-जुलती है. अंतर बस इतना है कि मर्केल का ताल्लुक लिंकनशायर के बजाय पूर्वी जर्मनी के एक सामान्य परिवार से है. उनका पालन-पोषण एक धार्मिक पिता ने किया था. बहुत कम लोग जानते हैं कि आमतौर पर ‘लीडर ऑफ द फ्री वर्ल्ड’ के नाम से लोकप्रिय एंजेला मर्केल राजनीति में आने से पहले वैज्ञानिक थीं.

Agency Inputs

संबंधित खबरे

Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें World Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.